सत्यनारायण ने इस पूरे घटनाक्रम पर रोशनी डालते हुए बताया कि निलंबन की वह गाज सबसे पहले राष्ट्रीय डोपिंगरोधी एजेंसी (नाडा) की ओर से गिरी थी। इसके बाद इसकी रिपोर्ट विश्व डोपिंगरोधी एजेंसी (वाडा) तक पहुंची, जिसके परिणामस्वरूप एशियाई पैरालंपिक समिति ने कड़ा फैसला लेते हुए उनके पदक वापस ले लिए।
यादव के दुखद निधन पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए सत्यनारायण ने स्वीकार किया कि हालांकि आत्महत्या के सटीक कारणों का खुलासा अभी नहीं हुआ है, लेकिन उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा, ‘‘मैं किसी एक ठोस कारण की पुष्टि तो नहीं कर सकता, लेकिन वह कई मोर्चों पर अवसाद से जूझ रहे थे। दो स्वर्ण पदक छिन जाने का सदमा उनके दिलो-दिमाग पर गहरा असर कर गया था। साथ ही, अपेक्षित पुरस्कार राशि और स्थायी नौकरी का न मिलना भी उनकी निराशा के बड़े कारण थे।’’
घटना की गंभीरता पर बात करते हुए सत्यनारायण ने बताया, ‘‘यह स्पष्ट है कि उन्होंने जहर खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त की है, लेकिन उन्होंने किस जहरीले पदार्थ का सेवन किया, यह पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा। उनके शरीर के बदलते रंग से जहर के असर की पुष्टि होती है।’’
अतीत और वर्तमान की तुलना करते हुए उन्होंने हैरानी जताई, ‘‘मुझे समझ नहीं आ रहा कि उन्होंने इतना आत्मघाती कदम क्यों उठाया, जबकि आज के दौर में पैरा-एथलीटों के पास करियर के ढेरों विकल्प मौजूद हैं। वह एक सफल कोच के रूप में नई पारी शुरू कर सकते थे। 40 साल पहले के मुकाबले आज पैरा खिलाड़ियों की स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्हें 2018 के जकार्ता एशियाई पैरा खेलों में मिली सफलता के लिए अच्छी-खासी इनामी राशि भी दी गई थी।’’
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