सटीक निशाना, ऐतिहासिक कामयाबी: मनीष नरवाल ने जीता रजत और पाया लॉस एंजिलिस का टिकट
एशियाई पैरा खेलों के मैदान से भारत के लिए दोहरी खुशी की खबर आई है। दिग्गज निशानेबाज मनीष नरवाल ने मंगलवार को पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल (SH1) स्पर्धा में न केवल रजत पदक अपने नाम किया, बल्कि लॉस एंजिलिस पैरालंपिक 2028 के लिए भारत को कोटा भी दिला दिया। इसी स्पर्धा के महिला वर्ग में सृष्टि अरोड़ा ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। इन शानदार उपलब्धियों के साथ अब भारतीय निशानेबाजी दल के पदकों की संख्या चार (1 स्वर्ण, 2 रजत और 1 कांस्य) हो गई है।
बल्लभगढ़ के अर्जुन पुरस्कार विजेता मनीष नरवाल ने बेहद कड़े फाइनल में 233.7 अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। वह मोना अग्रवाल और अवनि लेखरा के बाद लॉस एंजिलिस पैरालंपिक का कोटा हासिल करने वाले तीसरे भारतीय पैरा निशानेबाज बन गए हैं। गौरतलब है कि सोमवार को मोना और अवनि ने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में क्रमशः स्वर्ण और रजत जीतकर यह मुकाम हासिल किया था। स्पर्धा का स्वर्ण पदक दक्षिण कोरिया के जो जियोंगडू ने 241.3 अंकों के नए एशियाई पैरा रिकॉर्ड के साथ जीता, जबकि चीन के यांग चाओ को कांस्य मिला। भारत के ही रुद्रांक्ष खंडेलवाल 127.3 अंकों के साथ सातवें स्थान पर रहे।
मनीष नरवाल का यह प्रदर्शन उनके निरंतर शानदार फॉर्म का प्रमाण है। पेरिस पैरालंपिक 2024 में रजत और हांगझोउ 2023 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाले मनीष ने क्वालीफाइंग दौर में 570 अंकों के साथ पांचवां स्थान हासिल किया था, जबकि रुद्रांक्ष 571 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहकर फाइनल में पहुंचे थे। फाइनल मुकाबले में नरवाल ने दमदार शुरुआत की थी, लेकिन कोरियाई निशानेबाज जियोंगडू ने शुरुआती पांच शॉट में ही 4.3 अंकों की जो बढ़त बनाई, उसे अंत तक कायम रखते हुए सोना जीता। दिलचस्प बात यह है कि मनीष कभी पेशेवर फुटबॉलर बनने का सपना देखते थे, लेकिन शारीरिक अक्षमता के कारण उन्होंने अपनी राह बदली और निशानेबाजी को अपना जुनून बना लिया।
मैदान पर दूसरी ओर, सृष्टि अरोड़ा ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल (SH1) स्पर्धा में 214.7 अंक जुटाकर भारत की झोली में कांस्य पदक डाला। इस स्पर्धा में ईरान की फैजेह अहमदी (237.3) और सारेह जवानमर्दी (237.0) क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर रहीं। भारत की सुमेधा पाठक के लिए दिन कुछ खास नहीं रहा और वह 111.4 अंकों के साथ फाइनल से बाहर होने वाली पहली खिलाड़ी बनीं। बता दें कि SH1 श्रेणी उन जांबाज निशानेबाजों के लिए निर्धारित है, जो अंगों की दिव्यांगता के बावजूद बिना किसी बाहरी मदद के अपनी बंदूक संभालने और निशाना साधने की क्षमता रखते हैं।
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