टेनिस का उभरता सूरज: जब 14 साल के अल्काराज़ की ज़िद ने बदल दी डेविड फेरर की सोच
टेनिस जगत में आज कार्लोस अल्काराज़ एक चमकता सितारा हैं, लेकिन उनकी इस महानता की पहली झलक साल 2014 के एक यादगार ट्रेनिंग सेशन में ही दिख गई थी। स्पेन के डेविस कप कप्तान और पूर्व दिग्गज खिलाड़ी डेविड फेरर ने उस वाकये को याद किया है, जो इन दिनों खेल गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
उस समय अल्काराज़ महज़ 14 साल के किशोर थे, जबकि डेविड फेरर विश्व टेनिस के शिखर पर काबिज थे। यह मुलाकात पूर्व नंबर-1 जुआन कार्लोस फेररो की सिफारिश पर हुई थी, जिन्होंने मर्सिया के इस लड़के में कुछ ‘असाधारण’ देख लिया था। हालांकि, फेरर शुरुआत में इस ट्रेनिंग को लेकर कतई उत्साहित नहीं थे। उनका मानना था कि प्री-सीजन की कड़ी मेहनत के बीच एक बच्चे के साथ अभ्यास करना सिर्फ समय की बर्बादी होगी।
लेकिन जैसे ही खेल शुरू हुआ, कोर्ट का नज़ारा बदल गया। फेरर ने बताया कि आमतौर पर प्रोफेशनल खिलाड़ियों की आक्रामक हिटिंग के सामने युवा खिलाड़ी घुटने टेक देते हैं, मगर अल्काराज़ अलग मिट्टी के बने थे। उन्होंने न केवल फेरर के प्रहारों को झेला, बल्कि तीसरे ही शॉट पर गेंद की रफ़्तार बढ़ाकर दिग्गज फेरर को हक्का-बक्का कर दिया। फेरर को उस पल वही रोंगटे खड़े कर देने वाला अहसास हुआ, जैसा कभी शुरुआती दिनों के राफेल नडाल को देखकर होता था।
प्रैक्टिस के दौरान दोनों के बीच एक ‘सुपर टाईब्रेक’ भी हुआ, जिसे फेरर ने 10-8 से जीता। फेरर आज भी मानते हैं कि उस दिन अल्काराज़ उन्हें हरा सकते थे, लेकिन शायद बड़े खिलाड़ी के प्रति सम्मान के कारण उन्होंने अपनी पूरी ताकत नहीं झोंकी। फेरर के लिए वह सिर्फ एक मैच नहीं था; उन्होंने उस किशोर की आंखों में वो निडरता और खेल की गहरी समझ देख ली थी, जो उनकी उम्र से कहीं बड़ी थी।
फेरर के अनुसार, अल्काराज़ और नडाल की तुलना सिर्फ खेल तक सीमित नहीं है। व्यक्तित्व के मामले में भी अल्काराज़ उतने ही सहज, विनम्र और जमीन से जुड़े हुए हैं। मर्सिया का यह लड़का भले ही अलग परिवेश में बड़ा हुआ, लेकिन उसकी मेहनत और जज्बे में नडाल का डीएनए साफ झलकता है।
आज जब अल्काराज़ ने ऑस्ट्रेलियन ओपन जीतकर अपना ‘करियर ग्रैंड स्लैम’ पूरा कर लिया है, तो फेरर की वो पुरानी भविष्यवाणी सच साबित हुई है। चारों ग्रैंड स्लैम जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बनकर अल्काराज़ ने इतिहास रच दिया है। डेविड फेरर के लिए यह जीत उस 14 साल के लड़के की असाधारण प्रतिभा पर मुहर जैसी है, जिसे उन्होंने एक दशक पहले ही पहचान लिया था।
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