हॉकी की वह धुरंधर खिलाड़ी, जिसने दिलाया देश को गौरव!
प्रीतम, जिन्होंने 1998 के एशियाड में भारतीय हॉकी टीम की कमान संभाली, देश के लिए रजत पदक जीत कर लाईं। उनका ये शानदार प्रदर्शन यहीं नहीं रुका, बल्कि 2002 के कॉमनवेल्थ गेम्स में तो उन्होंने भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई।
खेल के मैदान से संन्यास लेने के बाद, प्रीतम ने 2002 में कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। साल 2010 में, वे भारतीय महिला हॉकी टीम की ट्रेनर के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। आज, सोनीपत में उनकी ‘द प्रीतम सिवाच एकेडमी’ कई युवा खिलाड़ियों को तराश रही है, जिनमें से कुछ तो ओलंपिक के मंच तक भी पहुंच चुकी हैं।
हॉकी के प्रति उनके इस असाधारण योगदान को देखते हुए, उन्हें 1998 में प्रतिष्ठित ‘अर्जुन अवॉर्ड’ से नवाजा गया। इसके बाद, 2021 में उन्हें ‘द्रोणाचार्य पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया, जो गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति उनके समर्पण का प्रमाण है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
