फुटबॉल का महासंग्राम: क्या $20 अरब का ‘सौदा’ छीन लेगा खेल की रूह?
विश्व फुटबॉल के मैदान पर इन दिनों गोल की नहीं, बल्कि एक बड़े व्यापारिक विद्रोह की गूंज सुनाई दे रही है। फीफा (FIFA) की नई कमर्शियल योजना ने यूरोपीय फुटबॉल महासंघ (UEFA) को युद्धस्तर पर खड़ा कर दिया है। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि यूईएफए ने अपने 55 सदस्य देशों की आपात बैठक बुला ली है। गलियारों में चर्चा है कि अगर फीफा पीछे नहीं हटा, तो भविष्य के विश्व कप के बहिष्कार जैसा कठोर कदम भी उठाया जा सकता है।
विवाद की जड़ है फीफा की महत्वाकांक्षी योजना—”फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज”। इसके तहत फीफा अपनी एक नई इकाई में बाहरी निवेशकों को हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है। यह इकाई सिर्फ कागजी नहीं होगी, बल्कि इसके पास पुरुष और महिला विश्व कप जैसे मेगा इवेंट्स के आयोजन और कमर्शियल अधिकार होंगे। $20 अरब के भारी-भरकम मूल्यांकन वाली इस कंपनी के जरिए फीफा बाजार से करीब $4.2 अरब जुटाना चाहता है।
इस हाई-प्रोफाइल सौदे की कड़ियां वैश्विक राजनीति और वित्त से भी जुड़ी हैं। फीफा ने इसके लिए दिग्गज वित्तीय संस्था जे.पी. मॉर्गन को साथ लिया है। निवेश की रेस में जोशुआ कुशनर की कंपनी ‘थ्राइव इटरनल’ का नाम सबसे ऊपर है। बता दें कि जोशुआ, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर के भाई हैं, जिससे इस डील ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर ली हैं।
यूईएफए ने इस योजना पर तीखा प्रहार करते हुए इसे फुटबॉल की मर्यादा का उल्लंघन बताया है। महासंघ का मानना है कि फुटबॉल की आत्मा, उसकी साख और पारदर्शिता को किसी कमर्शियल डील की वेदी पर नहीं चढ़ाया जा सकता। यूईएफए का कड़ा संदेश है कि फुटबॉल किसी संस्था की निजी जागीर नहीं है जिसे बाजार में नीलाम किया जाए। यह टकराव नया नहीं है; 2021 में भी जब फीफा ने हर दो साल में वर्ल्ड कप कराने का दांव चला था, तब बहिष्कार की धमकी के बाद उसे पीछे हटना पड़ा था।
विरोध की इस लहर में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम भी शामिल हो गए हैं, जिनका कहना है कि फुटबॉल निवेशकों की संपत्ति नहीं है। हालांकि, फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो इस योजना को ‘गेम चेंजर’ मान रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे होने वाली विशाल आय दुनिया भर के छोटे फुटबॉल देशों के विकास में काम आएगी।
फीफा ने अपने 211 सदस्य देशों को लुभाने के लिए आर्थिक सहायता का बड़ा ‘लालच’ भी पेश किया है। नई योजना के तहत, 2031-2034 के चक्र में प्रत्येक संघ को मिलने वाली राशि $80 लाख से बढ़ाकर $2 करोड़ तक की जा सकती है, जो आगे चलकर $2.4 करोड़ तक पहुंच जाएगी। फीफा का दावा है कि इस निवेश के बाद भी खेल के नियम, अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर और प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह उसके पास ही सुरक्षित रहेंगे।
फिलहाल, इस योजना पर अंतिम मुहर की कोई तारीख तय नहीं है, लेकिन 23 नवंबर को होने वाली फीफा की ऑनलाइन कांग्रेस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। वहां न केवल महिला विश्व कप की मेजबानी पर बात होगी, बल्कि यह भी तय होगा कि फुटबॉल का भविष्य किसी कॉर्पोरेट डील के हाथों बिकेगा या उसकी पारंपरिक गरिमा बरकरार रहेगी।
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