अस्तित्व की जंग: डच दीवार से टकराकर टूटी भारतीय उम्मीदें, सेमीफाइनल की राह अब कांटों भरी
(मोना पार्थसारथी)
एम्सटेलवीन, 22 अगस्त: अंतिम क्वार्टर की चंद लापरवाहियां भारतीय हॉकी टीम पर भारी पड़ गईं। शनिवार को एफआईएच विश्व कप के एक बेहद रोमांचक मुकाबले में नीदरलैंड ने भारत को 3-1 से शिकस्त देकर सेमीफाइनल का टिकट कटा लिया। पहले हाफ में डच टीम को नाकों चने चबवाने के बावजूद, भारतीय टीम अंततः घुटने टेकने पर मजबूर हो गई और अब उसकी सेमीफाइनल की उम्मीदें केवल गणितीय समीकरणों पर टिकी हैं। हालांकि, पूल के अन्य मैच में अर्जेंटीना द्वारा इंग्लैंड को 3-1 से हराने ने भारत के लिए धुंधली सी उम्मीद जरूर जगा रखी है।
अब भारत के सामने हिमालय जैसी चुनौती है; उसे सोमवार को अर्जेंटीना के खिलाफ कम से कम पांच गोलों के अंतर से जीत दर्ज करनी होगी और साथ ही यह दुआ भी करनी होगी कि नीदरलैंड की टीम इंग्लैंड को पटखनी दे दे। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली इस टीम के लिए अंतिम दस मिनट किसी बुरे सपने जैसे रहे, जहां छोटी सी चूक ने पूरे मैच का रुख बदल दिया। यदि टीम अर्जेंटीना को नहीं हरा पाती, तो उसे पांचवें से आठवें स्थान के क्लासीफिकेशन मुकाबलों से संतोष करना होगा।
इतिहास गवाह है कि विश्व कप के मंच पर भारत कभी नीदरलैंड को नहीं हरा पाया है—वही कसक यहाँ भी बरकरार रही। मैच की शुरुआत बेहद सधी हुई थी। भारतीय डिफेंस ने डच आक्रमण को इस कदर बांधे रखा कि पहले हाफ तक स्कोरकार्ड शून्य पर ही थमा रहा। तीसरे मिनट में भारत ने दाहिनी ओर से आक्रामक पैठ बनाई, लेकिन नीदरलैंड का डिफेंस अभेद्य रहा। आठवें मिनट में हार्दिक के पास पर राजिंदर ने विपक्षी घेरे (डी) में सेंध लगाई, पर सफलता हाथ नहीं लगी। 13वें मिनट में नीदरलैंड को पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे मनप्रीत सिंह ने अपनी जांबाज ‘रशिंग’ से नाकाम कर दिया।
दूसरे क्वार्टर में डच टीम ने दबाव बढ़ाया और लगातार तीन पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए, लेकिन भारतीय दीवार अडिग रही। 24वें मिनट में भारत के पास बढ़त लेने का सुनहरा मौका था जब मनप्रीत के सहयोग से दिलप्रीत सर्कल में पहुंचे, मगर डच गोलकीपर मेयेर डर्क चट्टान बनकर खड़े हो गए। हाफ टाइम से ठीक पहले सुखजीत को सर्कल में गिराए जाने पर भारत ने पेनल्टी कॉर्नर की मांग की, जिसे अंपायर ने खारिज कर दिया।
तीसरे क्वार्टर में खेल ने रफ्तार पकड़ी। 35वें मिनट में भारत को रेफरल के जरिए पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला, पर हरमनप्रीत की ड्रैग फ्लिक लक्ष्य से चूक गई। खेल के 41वें मिनट में भारत की एकाग्रता टूटी और डुको टेलगेनकेम्प ने एक शानदार डिफ्लेक्शन के जरिए नीदरलैंड का खाता खोल दिया। इसके बाद भारत ने जवाबी हमले किए, पर फिनिशिंग में कमी साफ दिखी।
51वें मिनट में नीदरलैंड ने भारतीय डिफेंस को छकाते हुए तीन लंबे पास के जादुई तालमेल से स्कोर 2-0 कर दिया, जिसे होडेनमेकर्स ने गोल में बदला। हालांकि, अगले ही मिनट कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने एक रॉकेट जैसी ड्रैग फ्लिक से गोल दागकर भारत को मैच में वापस ला खड़ा किया। लेकिन 55वें मिनट में अनुभव की कमी खली; मनप्रीत सिंह की एक छोटी सी चूक का फायदा उठाकर वान डैम ने भारतीय गोलकीपर को छकाते हुए स्कोर 3-1 कर दिया और भारत की वापसी के सारे रास्ते बंद कर दिए। इंग्लैंड से पहले दौर की हार के बाद भारत के पास अंकों का सूखा है, जो अब उसकी राह का सबसे बड़ा रोड़ा बन चुका है।
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