फर्श पर बैठकर करना पड़ा सफर
वापसी की यात्रा के लिए जिन टिकटों की बुकिंग की गई थी, वे कंफर्म नहीं हो पाए और खिलाड़ियों को कोई बर्थ आवंटित नहीं हुई। रेलवे और खेल विभाग के बीच तालमेल की कमी का सीधा असर इन बच्चों पर पड़ा। मजबूरी में सभी 18 खिलाड़ी नंदनकानन एक्सप्रेस के गेट और शौचालय के पास फर्श पर बैठकर घंटों का सफर करने को मजबूर हुए।
राष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले ये युवा पहलवान ट्रेन के टॉयलेट के पास बैठे रहे, जबकि उनके लिए पहले से एसी कोच की टिकट बुक की गई थी। यह हालात न सिर्फ असहज थे, बल्कि खिलाड़ियों की गरिमा पर भी सवाल खड़े करते हैं।
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