चेन्नई, सात नवंबर: भारतीय महिला टेनिस ने आज एक स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है। वैष्णवी अडकर और रुतुजा भोसले की शानदार जोड़ी ने डब्ल्यूटीए टूर स्तर के किसी टूर्नामेंट के युगल फाइनल में पहुंचने वाली पहली ऑल-इंडियन जोड़ी बनकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। शनिवार को यहां खेले गए चेन्नई ओपन टेनिस टूर्नामेंट के एक बेहद रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में, इस भारतीय जोड़ी ने पोलैंड की वेरोनिका फाल्कोव्स्का और अमेरिका की अलाना स्मिथ की दूसरी वरीयता प्राप्त जोड़ी को 6-2, 2-6, 10-8 से धूल चटा दी। भारतीय जोड़ी ने पहला सेट तो आसानी से अपने नाम किया, लेकिन दूसरे सेट में उनकी लय जरूर डगमगाई, हालांकि उन्होंने निर्णायक सुपर टाई-ब्रेक में गजब का संयम और मानसिक दृढ़ता दिखाते हुए यह ऐतिहासिक जीत हासिल की।
यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय महिला टेनिस के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहले कभी भी ऐसी किसी जोड़ी ने डब्ल्यूटीए टूर स्तर के फाइनल में जगह नहीं बनाई थी जिसमें दोनों खिलाड़ी विशुद्ध रूप से भारत की ही हों। इससे पहले, शिखा ओबरॉय और उनकी बहन नेहा 2005 के सनफीस्ट ओपन और ग्वांगझू ओपन के फाइनल में जरूर पहुंची थीं, लेकिन नेहा अमेरिका का प्रतिनिधित्व करती थीं, जिससे वह एक भारत-अमेरिका की संयुक्त जोड़ी बन गई थी।
भारतीय टेनिस की दिग्गज सानिया मिर्जा ने अपने चमकदार और शानदार करियर के दौरान 43 युगल खिताब अपने नाम किए, लेकिन अपने पूरे करियर में उन्होंने कभी भी किसी भारतीय महिला खिलाड़ी के साथ जोड़ी बनाकर यह मुकाम हासिल नहीं किया था। इसके अलावा, अंकिता रैना और करमन थंडी ने 2018 में डब्ल्यूटीए 125 युगल खिताब जरूर जीता था, जो मुख्य टूर से ठीक एक स्तर नीचे की प्रतियोगिता है। साथ ही, प्रार्थना थोम्बारे ने नीदरलैंड की अपनी साथी एरियन हार्टोनो के साथ मिलकर तीन डब्ल्यूटीए 125 फाइनल्स में प्रवेश किया था।
मुकाबले की शुरुआत में, पहले सेट में अडकर और भोसले पूरी तरह से छाए हुए थे और उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों की कमजोरियों व गलतियों का पूरा फायदा उठाते हुए 4-1 की एक मजबूत और शानदार बढ़त बना ली थी। मैच के तीसरे गेम में भारतीयों को पहली बड़ी सफलता तब हाथ लगी जब अडकर ने स्मिथ की दूसरी सर्व पर एक ऐसा जोरदार और आक्रामक रिटर्न शॉट जमाया कि फाल्कोव्स्का उसे कोर्ट के भीतर वापस नहीं भेज पाईं। इसी धमाकेदार अंदाज में खेलते हुए भारतीय जोड़ी ने पहला सेट बेहद आसानी से अपने नाम कर लिया।
हालांकि, मैच के दूसरे सेट में खेल का पूरा रुख ही पलट गया। इस सेट में भारतीय जोड़ी ने तीसरे और पांचवें गेम में स्मिथ और फाल्कोव्स्का की सर्विस को तोड़ने के कई सुनहरे मौके गंवा दिए। इस नाकामी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा और उनकी प्रतिद्वंद्वी जोड़ी ने इस सेट को अपने नाम करते हुए मुकाबले को सीधे निर्णायक सुपर टाई-ब्रेक तक खींच लिया।
अब फैसला सुपर टाई-ब्रेक से होना था, जहां तनाव अपने चरम पर था। शुरुआत में फाल्कोव्स्का और स्मिथ ने 3-0 की बढ़त बनाकर मैच पर शिकंजा कसने की कोशिश की, लेकिन भारतीय जोड़ी ने हार न मानते हुए शानदार वापसी की। इसके बाद एक बार फिर भारतीय जोड़ी 6-8 से पिछड़ गई और हार नजदीक दिखने लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और गजब का जज्बा दिखाते हुए लगातार चार बेहतरीन अंक बटोरे और अंततः फाइनल में अपनी पक्की जगह सुरक्षित कर ली।
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