उज्जैन शाही मस्जिद पर जुमे की नमाज से पहले हाई अलर्ट, 2500 पुलिसकर्मी और ड्रोन-CCTV से निगरानी

By
PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
- Editor
5 Min Read
उज्जैन शाही मस्जिद पर जुमे की नमाज से पहले हाई अलर्ट, 2500 पुलिसकर्मी और ड्रोन-CCTV से निगरानी

उज्जैन की शाही मस्जिद को लेकर हालिया तनाव के बाद जुमे की नमाज से पहले पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। संवेदनशील इलाकों में करीब 2,500 पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ CCTV और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री फैलाने वालों पर भी कार्रवाई जारी है।

जुमे की नमाज को लेकर सुरक्षा कड़ी

उज्जैन में शुक्रवार की जुमे की नमाज को देखते हुए पुलिस प्रशासन हाई अलर्ट पर है। शाही मस्जिद और आसपास के संवेदनशील इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक शहर में करीब 2,500 पुलिसकर्मी और अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं।

संवेदनशील स्थानों, प्रमुख चौराहों और धार्मिक स्थलों के आसपास लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है। पुलिस अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहकर हालात पर नजर रख रहे हैं।

CCTV और ड्रोन से चप्पे-चप्पे पर नजर

सुरक्षा व्यवस्था के तहत शाही मस्जिद और आसपास के क्षेत्र में CCTV कैमरों और ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है। पुलिस की कोशिश है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या भीड़ जुटने की स्थिति की तत्काल जानकारी मिल सके।

पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा भी इलाके में गश्त करते नजर आए। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी अपुष्ट सूचना पर भरोसा नहीं करने की अपील की है।

सोशल मीडिया पर भी पुलिस की नजर

शाही मस्जिद विवाद के दौरान सोशल मीडिया पर भ्रामक और कथित तौर पर AI से तैयार किए गए वीडियो के प्रसार को लेकर पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, ऐसे वीडियो में पूरी मस्जिद को गिराए जाने का दावा दिखाया गया था, जबकि विवाद वास्तव में सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले एक हिस्से को हटाने से जुड़ा था।

पुलिस के अनुसार, पांच सोशल मीडिया अकाउंट/पेज के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और 100 से ज्यादा अकाउंट या पोस्ट की जांच की गई है। पुलिस ने लोगों से अफवाह और भड़काऊ सामग्री को आगे शेयर नहीं करने की अपील की है।

28 सितंबर को हुआ था तनाव

शाही मस्जिद के सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई के दौरान 28 सितंबर को इलाके में तनाव बढ़ गया था। पुलिस के अनुसार, मौके पर पथराव के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की गई तथा RAF को भी तैनात किया गया।

रिपोर्टों के अनुसार, इस घटनाक्रम के बाद कई FIR दर्ज हुईं और गिरफ्तारियां भी की गईं। पुलिस सोशल मीडिया गतिविधियों और CCTV-ड्रोन फुटेज की भी जांच कर रही है।

तीन फीट हिस्से को हटाने पर बनी थी सहमति

शाही मस्जिद विवाद का संबंध सड़क चौड़ीकरण की योजना से है, जिसे सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से जोड़ा गया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच सहमति बनी थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक शुरुआत में करीब 9.5 फीट हिस्से को हटाने की मांग थी, लेकिन समझौते में करीब तीन फीट हिस्से को हटाने पर सहमति बनी।

समझौते के तहत प्रभावित दुकानों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और मुआवजे से जुड़े प्रावधानों पर भी सहमति की बात सामने आई है। मस्जिद परिसर की मीनार को स्थानांतरित करने का मुद्दा भी समझौते का हिस्सा बताया गया है।

अभी प्रशासन की प्राथमिकता शांति व्यवस्था

फिलहाल पुलिस और प्रशासन का फोकस जुमे की नमाज के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है। भारी पुलिस बल, CCTV और ड्रोन निगरानी के साथ सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है।

प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध या भ्रामक सामग्री को सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें। विवाद से जुड़े आरोपों और पुलिस कार्रवाई की जांच अलग-अलग स्तरों पर जारी है।
उज्जैन में शाही मस्जिद विवाद के बाद शुक्रवार की नमाज को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी की गई है। 2,500 पुलिसकर्मियों की तैनाती और तकनीकी निगरानी के बीच प्रशासन की कोशिश है कि क्षेत्र में शांति बनी रहे और किसी भी अफवाह या तनाव को बढ़ने से रोका जा सके।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *