बिहार में जेडीयू के भीतर अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रही राजनीतिक तनातनी अब पार्टी नेतृत्व तक पहुंच चुकी है। नीतीश कुमार ने ललन सिंह से मुलाकात की, जिसके बाद ललन सिंह ने अनंत सिंह से बात की। अनंत सिंह सार्वजनिक बयानबाजी से पीछे हटे हैं, लेकिन नीरज के खिलाफ उनकी नाराजगी अभी खत्म नहीं हुई है।
नीतीश अचानक पहुंचे ललन सिंह के घर
पटना स्नातक एमएलसी सीट को लेकर जेडीयू के भीतर बढ़ते विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार सोमवार को केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के आवास पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच करीब 15 से 20 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई, जब पार्टी नेतृत्व ने अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद को शांत कराने की जिम्मेदारी ललन सिंह को दी थी। इसके बाद ललन सिंह ने अनंत सिंह से बातचीत की।
ललन सिंह ने अनंत को सार्वजनिक बयान से रोका
ललन सिंह के मुताबिक, उन्होंने अनंत सिंह से उनकी शिकायतों और मुद्दों पर बात की। इसके बाद उन्होंने अनंत सिंह से कहा कि वह नीरज कुमार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयानबाजी न करें, ताकि पार्टी को नुकसान न हो।
रिपोर्टों के मुताबिक, अनंत सिंह इस बात पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने नीरज कुमार के समर्थन में प्रचार करने का फैसला कर लिया है।
अनंत सिंह का पहले से कहना रहा है कि जिस व्यक्ति ने उनका विरोध किया, वह उसके लिए वोट नहीं मांगेंगे। यही वजह है कि विवाद पूरी तरह खत्म हुआ है या सिर्फ सार्वजनिक बयानबाजी पर रोक लगी है, यह चुनाव के दौरान ज्यादा स्पष्ट होगा।
‘क्रिया होगी तो प्रतिक्रिया भी होगी’, ललन सिंह का बड़ा बयान
अनंत सिंह से बातचीत के बाद ललन सिंह ने उनके पक्ष में भी कई बातें रखीं। उन्होंने कहा कि अगर कोई क्रिया होगी तो उसकी प्रतिक्रिया भी होगी और ताली एक हाथ से नहीं बजती।
ललन सिंह ने दावा किया कि विधानसभा चुनाव के दौरान अनंत सिंह के खिलाफ प्रचार हुआ था और उस समय पार्टी नेतृत्व की ओर से उचित कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने इसे प्रदेश नेतृत्व की चूक बताया।
यानी ललन सिंह ने एक तरफ अनंत सिंह को सार्वजनिक बयानबाजी से रोकने की कोशिश की, वहीं दूसरी तरफ उनकी शिकायतों को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया।
नीरज के खिलाफ क्यों हैं अनंत सिंह?
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू ने एक बार फिर नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है। लेकिन अनंत सिंह अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ खड़े हैं। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह का खुला समर्थन किया है और उनके नामांकन कार्यक्रम में भी शामिल हुए थे।
दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप इतना बढ़ गया कि सार्वजनिक बहस की चुनौती और कथित तौर पर करोड़ों रुपये की शर्त तक की चर्चा सामने आई। अनंत सिंह ने इसे अपनी व्यक्तिगत लड़ाई बताया है और नीतीश कुमार के प्रति सम्मान अलग से जाहिर किया है।
AK-47 मामले का भी जुड़ा है विवाद
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच पुरानी राजनीतिक अदावत भी इस विवाद की पृष्ठभूमि में चर्चा में है।
2019 में अनंत सिंह के पैतृक गांव लदमा स्थित घर से AK-47, कारतूस और हैंड ग्रेनेड बरामद होने का मामला सामने आया था। इस मामले में उन पर UAPA समेत कई धाराओं में केस चला और निचली अदालत ने उन्हें सजा सुनाई थी। बाद में अगस्त 2024 में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया।
अनंत सिंह ने आरोप लगाया था कि हथियार उनके खिलाफ साजिश के तहत रखे गए थे और इसके पीछे नीरज कुमार का हाथ था। नीरज कुमार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। इसलिए इस आरोप को तथ्य के तौर पर नहीं, बल्कि अनंत सिंह के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
क्या खत्म हुआ विवाद या सिर्फ बदली रणनीति?
फिलहाल तस्वीर यह है कि ललन सिंह की मध्यस्थता के बाद अनंत सिंह ने सार्वजनिक बयानबाजी पर विराम लगाने की सहमति दी है। लेकिन नीरज कुमार के समर्थन में खुलकर आने का फैसला उन्होंने नहीं किया है।
ऐसे में जेडीयू के सामने चुनौती दोहरी है—एक तरफ पार्टी उम्मीदवार नीरज कुमार के पक्ष में चुनावी अभियान को मजबूत करना और दूसरी तरफ पार्टी के भीतर पैदा हुई नाराजगी को नियंत्रित रखना।
पटना स्नातक सीट पर मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां जेडीयू के अंदर की यह खींचतान सीधे चुनावी मैदान में दिखाई दे रही है। अब देखना होगा कि अनंत सिंह का शांत रुख सिर्फ बयानों तक सीमित रहता है या चुनावी रणनीति में भी इसका असर दिखाई देता है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


