खेत बचाने को ‘कफन’ से हुंकार: वाराणसी में किसानों और महिलाओं का ‘करो या मरो’ प्रदर्शन!

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Varanasi News: खेत-खलिहान बचाने को किसानों ने सिर पर बांधा कफन, पिंडरा में महिलाओं संग दिखा अनोखा प्रदर्शन | varanasi news farmers wear coffin save farmland unique protest with women in pindra uttar pradesh

वाराणसी में ‘कफन बांध’ प्रदर्शन: अपनी ज़मीन बचाने सड़कों पर उतरे सैकड़ों किसान, सरकार को खुली चुनौती!

Varanasi News: वाराणसी के पिंडरा विधानसभा क्षेत्र में शनिवार को किसानों ने एक चौंकाने वाले और अनोखे तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। सिर पर कफन बांधे, दर्जनों किसान सड़कों पर उतर आए और सरकार को खुली चुनौती दी। उनकी दो टूक मांग थी: उनकी उपजाऊ भूमि को किसी भी कीमत पर बचाया जाए।

किसानों ने आरोप लगाया कि ‘विकास योजनाओं’ की आड़ में उनकी जमीनें छीनी जा रही हैं। गाँव-गाँव में जारी अधिग्रहण प्रक्रिया ने किसानों को भारी परेशानी और भय के साए में धकेल दिया है। ढाई साल से चला आ रहा यह आंदोलन अब और अधिक तीव्र होता दिखाई दे रहा है।

इस भावुक प्रदर्शन में प्रभावित गाँवों की महिलाएँ भी पीछे नहीं रहीं। उन्होंने भी कफन धारण कर सरकार के विरुद्ध अपनी बुलंद आवाज़ उठाई। उनका तर्क था कि खेत केवल रोज़गार का साधन नहीं, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य की सुरक्षित गारंटी भी हैं। ऐसे में सरकार उन्हें जबरन अधिग्रहित नहीं कर सकती।

दस गाँवों की ज़मीन पर लटकी अधिग्रहण की तलवार

यह योजना पिंडरा तहसील क्षेत्र के 10 गाँवों को सीधे प्रभावित करेगी। कैथोली, बसनी, बेलवा और आसपास के गाँवों के किसानों का दृढ़ता से कहना है कि वे अपनी ज़मीन के बिना कुछ भी नहीं हैं। उनकी पीढ़ियाँ पूर्वजों से मिली इसी उपजाऊ भूमि पर निर्भर रही हैं। यह केवल ज़मीन नहीं, बल्कि उनकी मातृभूमि, कर्मभूमि और उनकी आजीविका का अक्षुण्ण आधार है।

ग्रामीणों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सरकार मात्र ‘योजनाओं’ का हवाला देकर उनकी खेती योग्य ज़मीनों को हड़प रही है। विडंबना यह है कि किसानों को न तो कोई वैकल्पिक सुविधा प्रदान की जा रही है और न ही रोज़गार का कोई ठोस भरोसा। उनके लिए यह सीधा-सीधा उनके अस्तित्व पर आया संकट है।

किसान आंदोलन को मिला नेताओं का प्रबल समर्थन

अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष रामजी सिंह ने सशक्त शब्दों में कहा कि किसान भले ही मिट जाएँ, पर अपनी ज़मीन कभी नहीं छोड़ेंगे। इसे किसानों की जीवनरेखा बताते हुए, उन्होंने सरकार से इस फैसले पर तत्काल पुनर्विचार की पुरज़ोर मांग की।

इसी कड़ी में किसान नेता संतोष सिंह ने भी कड़ी चेतावनी दी कि जब तक यह योजना पूरी तरह निरस्त नहीं होती, तब तक आंदोलन अनवरत जारी रहेगा। उन्होंने कफन धारण करने का मर्म समझाते हुए कहा कि यह मरते दम तक अपनी खेतों की हिफाज़त करने का एक अडिग प्रतीक है।

पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर, महिलाएं भी विरोध के मैदान में

विरोध प्रदर्शन में मुखर मंजू देवी ने भावुक होकर कहा कि ज़मीन के बिना उनका पूरा परिवार बिखर जाएगा। उनके साथ इसरावती देवी, निर्मला देवी और अन्य ग्रामीण महिलाएँ भी मजबूती से खड़ी थीं। उन्होंने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया कि इस संघर्ष में महिलाएँ भी पीछे हटने वाली नहीं हैं।

महिलाओं ने यह भी स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल उनके खेतों का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का महासंग्राम है। उन्होंने आगाह किया कि यदि खेत छिन गए, तो उनके परिवार भूखे रहने को विवश हो जाएँगे। इसीलिए वे अपने पुरुष साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पूरी दृढ़ता से डटी हुई हैं।

दूसरी ओर, अधिकारियों का पक्ष है कि जिस ज़मीन के लिए किसान धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, वह वास्तव में किसानों की निजी नहीं, बल्कि सरकारी ज़मीन है, जिस पर वे लंबे समय से खेती करते आ रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी किसान की ज़मीन जबरदस्ती अधिग्रहित नहीं की जाएगी।


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