पूर्णिया का स्वास्थ्य संकट: क्यों हर दिन 10,000 मजबूर मरीज सरकारी अस्पतालों से मुंह मोड़ निजी क्लीनिकों का रुख करते हैं?
बिहार के पूर्णिया में स्वास्थ्य सेवाओं की भयावह तस्वीर सामने आई है, जहाँ सरकारी सिस्टम की खामियों के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर धकेलने पर मजबूर होना पड़ रहा है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर करारा प्रहार करते हुए एक चौंकाने वाला खुलासा किया है।
तेजस्वी यादव के अनुसार, “सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, स्वास्थ्य उपकरणों और बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। इसी अभाव के चलते पूर्णिया के निजी अस्पतालों में प्रतिदिन 10,000 मरीज जाने को मजबूर हैं।”
उन्होंने सीधे तौर पर एनडीए सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि “भ्रष्ट मंत्री और अधिकारी कमीशन खाने की होड़ में हैं।” वे हजारों करोड़ रुपए केवल शानदार इमारतें बनाने पर खर्च कर देते हैं, लेकिन इनमें जान फूंकने वाले डॉक्टर्स, स्वास्थ्य कर्मी, लैब टेक्निशियन, ड्रेसर और असिस्टेंट की नियुक्तियों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जाता है। इतना ही नहीं, करोड़ों के स्वास्थ्य उपकरण भी ‘कमीशन’ के खेल में खरीद लिए जाते हैं, पर उन्हें चलाने वाले प्रशिक्षित टेक्निशियन की बहाली कभी नहीं होती, जिससे ये उपकरण शोपीस बनकर रह जाते हैं।
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