दतिया के बड़िनिया गांव में आस्था और भरोसे से जुड़ा मामला अब पुलिस तक पहुंच गया है। ग्रामीणों ने कथित बाबा राधेश्याम और उसके दो साथियों पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी का आरोप लगाया है। शिकायत के साथ बैंक लेन-देन, नकदी और जमीन से जुड़े दस्तावेज भी सौंपे गए हैं।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे ग्रामीण
मंगलवार को बड़ी संख्या में बड़िनिया गांव के ग्रामीण दतिया पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने लिखित शिकायत देकर कथित बाबा राधेश्याम, कमल किशोर और संतोष बागला के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की।
शिकायतकर्ताओं ने पुलिस को बैंक खातों से जुड़े लेन-देन, नकद रकम और जमीन के दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इन लोगों के जरिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये की कथित ठगी की गई।
12 साल से गांव में रह रहा था कथित बाबा
ग्रामीणों के अनुसार राधेश्याम करीब 12 वर्षों से बड़िनिया गांव में बाबा के रूप में रह रहा था। हर गुरुवार मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को वह भभूति देता था और लोगों की समस्याएं दूर करने तथा काम पूरे कराने का भरोसा देता था।
समय के साथ स्थानीय लोगों का विश्वास बढ़ता गया। इसी भरोसे के बीच ग्रामीणों का आरोप है कि बाद में उनसे आर्थिक लेन-देन शुरू हुआ।
रकम दोगुनी करने का लगाया आरोप
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ लोगों को रकम दोगुनी करने का लालच दिया गया। इसके लिए बैंक खातों में पैसे जमा कराने की बात कही गई। कुछ ग्रामीणों ने जमीन के दस्तावेज दिखाकर जमीन दिलाने या बेचने के नाम पर भी रकम लिए जाने का आरोप लगाया है।
जब लोगों ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की तो कथित तौर पर उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई। शिकायत में परिवार के साथ अनहोनी होने की धमकी दिए जाने का भी उल्लेख है।
दो अन्य लोगों की भूमिका पर सवाल
ग्रामीणों ने कमल किशोर और संतोष बागला को भी कथित मामले में शामिल बताया है। उनका आरोप है कि कमल किशोर बाबा के संपर्क में था और जमीन से संबंधित कामकाज देखता था।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित आर्थिक लेन-देन में किसकी क्या भूमिका थी।
यज्ञ और पदयात्रा का भी किया जिक्र
ग्रामीणों ने शिकायत में वर्ष 2023 में आयोजित यज्ञ का भी उल्लेख किया है। इसके अलावा नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच दतिया से खाटूश्याम तक निकाली गई पदयात्रा का जिक्र भी किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक गतिविधियों के कारण लोगों का कथित बाबा पर भरोसा और मजबूत हुआ।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल मामला ग्रामीणों के आरोपों और पुलिस को सौंपे गए दस्तावेजों की जांच के चरण में है। पुलिस बैंक लेन-देन, जमीन के कागजात और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल करेगी।
अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि आस्था से बना भरोसा आखिर आर्थिक लेन-देन तक कैसे पहुंचा और कथित तौर पर कितनी रकम वास्तव में ली गई। अब पुलिस जांच ही आरोपों और हकीकत के बीच की पूरी तस्वीर साफ करेगी।
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