बहुविवाह पर कड़ा प्रहार: एक नया कानून, नई सजाएँ
एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, एक प्रस्तावित अधिनियम के तहत बहुविवाह को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने की तैयारी है। यह विधेयक न केवल बहुविवाह करने वालों को दंडित करेगा, बल्कि उन सभी को भी जवाबदेह ठहराएगा जो इस प्रथा में किसी भी तरह से शामिल हैं।
सजा का प्रावधान:
- बार-बार अपराध करने पर दोगुनी सजा: जो कोई भी व्यक्ति दोबारा बहुविवाह में लिप्त पाया जाएगा, उसे निर्धारित सजा से दोगुनी सजा का सामना करना पड़ेगा।
- अभिभावकों और समुदाय के नेताओं पर शिकंजा: यदि कोई ग्राम प्रधान, काजी, माता-पिता या कानूनी अभिभावक बेईमानी से तथ्य छिपाता है या जानबूझकर बहुविवाह में भाग लेता है, तो उसे दो साल तक की जेल और एक लाख रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।
- अवैध विवाह कराने वालों की खैर नहीं: अवैध शादियों को संपन्न कराने वाले काजी, पुजारी या प्रधान को भी दो साल की जेल और डेढ़ लाख रुपये के जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
विशेष छूट:
यह कानून छठे शेड्यूल क्षेत्रों और शेड्यूल्ड ट्राइब वर्ग पर लागू नहीं होगा। सरकार के अनुसार, इन क्षेत्रों की स्थानीय प्रथाओं को ध्यान में रखते हुए यह छूट दी गई है।
धर्मनिरपेक्षता पर जोर:
असम बहुविवाह निषेध विधेयक, 2025 के पारित होने के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह कानून धर्म से परे है और किसी विशेष समुदाय या धर्म के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा, “यह हमारी भी जिम्मेदारी है। इस विधेयक के दायरे में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और सभी अन्य समाजों के लोग आएंगे।” मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि बहुविवाह से हिंदू समाज भी अछूता नहीं है।
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