सत्ता के गलियारों से एक तीखा सवाल गूंजा: “आप ‘जाति, माटी और भेटी’ के संकल्प के साथ आए थे, लेकिन आज जाति कमजोर है, माटी बिक चुकी है और भेटी के साथ छल हुआ है। आखिर क्यों असम और समूचा पूर्वोत्तर आज खुद को राजनीतिक रूप से अनाथ महसूस कर रहा है?”
असमिया जनजीवन में ‘भेटी’ शब्द का गहरा महत्व है, जो घर और मातृभूमि की जड़ों का प्रतीक है।
इतना ही नहीं, सरकार की विदेश नीति पर प्रहार करते हुए कांग्रेस ने पूछा, “आपकी कूटनीतिक विफलताओं ने बांग्लादेश को चीन के और करीब कर दिया है। इससे असम के सामने सुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं का नया संकट खड़ा हो गया है। आखिर ऐसा क्यों हुआ?”
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