चित्तूर में नाबालिग से बलात्कार: पोक्सो और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज, पुलिस की मुस्तैदी जारी
आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले से दिल दहला देने वाली एक घटना सामने आई है। चित्तूर तालुक पुलिस ने मुराकम्बट्टू इलाके में एक नाबालिग लड़की के साथ हुए बलात्कार के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।
यह शर्मनाक घटना 25 सितंबर को नागरवनम पार्क में घटित हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ असामाजिक तत्वों ने पार्क में मौजूद एक युवा जोड़े को निशाना बनाया। उन्होंने न केवल युवक और युवती से मारपीट की, बल्कि उनके कीमती सामान भी लूट लिए। घटना के चार दिन बाद, 29 सितंबर को, युवक ने हिम्मत जुटाकर चित्तूर तालुक पुलिस स्टेशन में आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस पूछताछ के दौरान, पीड़ित युवक ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि आरोपियों ने न केवल उसे धमकाया और पीटा, बल्कि उसके साथ मौजूद नाबालिग प्रेमिका के साथ भी दरिंदगी की। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़िता और उसके माता-पिता से संपर्क किया। उनकी काउंसलिंग की गई और लड़की को मानसिक संबल प्रदान करने के लिए चित्तूर सरकारी अस्पताल के वन-स्टॉप सेंटर ले जाया गया। यहां, एक महिला अधिकारी की मौजूदगी में, कानून के प्रावधानों के अनुसार पीड़िता का विस्तृत बयान दर्ज किया गया।
पीड़िता के बयान के आधार पर, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), पोक्सो अधिनियम और एससी/एसटी (पीओए) संशोधन अधिनियम की संबंधित धाराओं को लागू करते हुए आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों की पहचान मुरकम्बट्टू निवासी महेश, एक किशोर (जिसकी उम्र के कारण पहचान गुप्त रखी गई है) और सांतापेटा निवासी हेमंत प्रसाद के रूप में हुई है।
फिलहाल, फरार चल रहे इन आरोपियों को पकड़ने के लिए चित्तूर सब-डिवीजन डीएसपी टी. साईनाथ के कुशल नेतृत्व में विशेष टीमों का गठन किया गया है। पुलिस इन दरिंदों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
चित्तूर जिले के पुलिस अधीक्षक, तुषार डूडी, आईपीएस, ने इस मामले को लेकर सख्त रवैया अपनाया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जाँच पूरी सख्ती, निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ की जा रही है। उन्होंने जनता से किसी भी प्रकार की अफवाहें फैलाने या पीड़िता की पहचान उजागर करने के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की है। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कृत्य पोक्सो अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध हैं और कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आम जनता से भी इस गंभीर मामले की जाँच में पूरा सहयोग करने और किसी भी प्रकार की गलत या भ्रामक जानकारी न फैलाने की अपील की है।
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