भारत की फार्मा क्रांति: 130 अरब डॉलर के पार, दुनिया को देगा किफायती स्वास्थ्य समाधान
नई दिल्ली: भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है, जो देश की अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्वास्थ्य सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। वर्तमान में 60 अरब डॉलर का घरेलू फार्मा बाजार 2030 तक दोगुना होकर 130 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, 27.8 अरब डॉलर का फार्मा निर्यात इस वर्ष के अंत तक 30 अरब डॉलर के आंकड़े को छूने की ओर अग्रसर है।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार के साथ जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इस प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डीबीटी की जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) और उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल (यूपीपीपीसी) के बीच यह सहभागिता फार्मा, बायोटेक और मेडटेक क्षेत्रों में नवाचार, उद्यमिता और निवेश को बढ़ावा देगी। यह केंद्र-राज्य साझेदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो देश के विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
स्वास्थ्य सेवा में भारत का बढ़ता दबदबा
डॉक्टर सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने पिछले कुछ वर्षों में अविश्वसनीय वृद्धि दर्ज की है। 2014 में जहां इस क्षेत्र में मात्र 50 स्टार्टअप थे, वहीं अब इनकी संख्या 11,000 से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा देश की आर्थिक और स्वास्थ्य सेवा की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की क्षेत्र की क्षमता को दर्शाता है। भारत अब वैश्विक स्तर पर टीकों के एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित हो चुका है, जहां दुनिया के 60% से अधिक टीके निर्मित होते हैं और 200 से अधिक देश भारतीय टीकों का उपयोग कर रहे हैं।
यह डीबीटी-यूपी जैसा समझौता "विकसित भारत 2047" के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण साबित होगा। साथ ही, भारत किफायती स्वास्थ्य सेवा समाधानों के प्रदाता के रूप में अपनी वैश्विक स्थिति को और मजबूत करेगा, जो "भारत में निर्मित, विश्व के लिए निर्मित" की भावना को साकार करेगा।
किफायती तकनीकों का विस्तार और नवाचार को बढ़ावा
जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव और बीआईआरएसी के अध्यक्ष, डॉक्टर राजेश एस गोखले ने कहा कि उत्तर प्रदेश के साथ यह समझौता नवाचार के नए द्वार खोलेगा और किफायती तकनीकों को बढ़ावा देगा। उन्होंने बताया कि देश की जैव अर्थव्यवस्था लगभग 165 अरब अमेरिकी डॉलर की है और राज्यों के साथ साझेदारी इसे और विस्तारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सलाहकार, अवनीश कुमार अवस्थी ने राज्य की प्रतिबद्धता को दोहराया कि वह खुद को फार्मा, बायोटेक और मेडटेक के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। डीबीटी-बीआईआरएसी के सहयोग से लखनऊ में बायोटेक पार्क, ग्रेटर नोएडा में मेडिकल डिवाइस पार्क और ललितपुर में बल्क ड्रग एंड फार्मा पार्क जैसी पहलों का विस्तार किया जाएगा। इन प्रयासों का उद्देश्य स्टार्टअप्स को विकसित करना और स्वास्थ्य सेवा वितरण में परिवर्तनकारी अनुसंधान सहयोग को प्रोत्साहित करना है।
यह बहुआयामी सहयोग भारत को न केवल एक फार्मास्युटिकल महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगा, बल्कि दुनिया भर में सुलभ और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं के प्रसार में भी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
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