अनिश्चित वैश्विक परिवेश में भारत का डंका: एन. चंद्रशेखरन ने साझा किया ‘विकसित भारत’ का रोडमैप
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली: टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने भारतीय अर्थव्यवस्था की अटूट मजबूती पर जोर देते हुए कहा है कि आज जब पूरी दुनिया अनिश्चितता और कठिन दौर से जूझ रही है, तब भारत एक बेहद सुरक्षित और सुदृढ़ स्थिति में खड़ा है। सोमवार को अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के आर्थिक संकेतक इस स्थिरता की पुष्टि करते हैं। उन्होंने भविष्य की राह दिखाते हुए कहा कि निरंतर विकास की गति बनाए रखने के लिए ऊर्जा सुरक्षा, उन्नत विनिर्माण (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग) में रोजगार के अवसर और मानव पूंजी में निवेश करना “अति आवश्यक” है। चंद्रशेखरन के अनुसार, ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प अब देश के विभिन्न क्षेत्रों की कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे, मजबूत संस्थानों और बौद्धिक संपदा पर आधारित एक समावेशी और टिकाऊ विकास मॉडल की जरूरत बताई। चेयरमैन ने दोहराया कि ‘विकसित भारत 2047’ का विजन देश के कोने-कोने तक पहुंच गया है, लेकिन इसे पूर्ण करने के लिए हमें उच्च मानकों वाले संस्थानों और सस्टेनेबल ग्रोथ पर विशेष ध्यान देना होगा।
भारतीय फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (आईएफक्यूएम) संगोष्ठी 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि भविष्य की प्रगति के लिए गुणवत्ता, नवाचार और संस्थान निर्माण—ये तीनों ही आधार स्तंभ होंगे। चंद्रशेखरन ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने पिछले कुछ वर्षों में न केवल शानदार प्रदर्शन किया है, बल्कि लगातार उम्मीदों से बेहतर परिणाम देकर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का खिताब हासिल किया है। उनके अनुसार, भारत की यह विकास यात्रा मजबूत घरेलू मांग, सेवाओं के निर्यात और सरकार की विकासोन्मुख नीतियों के संगम से संचालित हो रही है।
आर्थिक आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वाहन बिक्री, ऋण प्रवाह, बिजली की खपत और सीमेंट की मांग में दिख रही तेजी इस बात का प्रमाण है कि हमारी अर्थव्यवस्था की बुनियाद बहुत गहरी है। उन्होंने आगे बताया कि चालू खाते का घाटा (CAD) जीडीपी के एक प्रतिशत से कम रहना, सेवा निर्यात का जीडीपी के 11 प्रतिशत तक पहुंचना, विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड स्तर और बैंकों के एनपीए में भारी कमी जैसे कारक भारत को वैश्विक मंच पर एक स्थिर शक्ति के रूप में स्थापित करते हैं।
दीर्घकालिक संवृद्धि के मंत्र पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हमें ऊर्जा के क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता, अत्याधुनिक विनिर्माण तकनीकों के जरिए रोजगार सृजन और अपनी जनशक्ति के कौशल विकास पर भारी निवेश करना होगा। चंद्रशेखरन ने भारतीय विनिर्माताओं से अपील की कि वे केवल उत्पादन पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता और पर्यावरण के अनुकूल ‘टिकाऊ विनिर्माण प्रक्रियाओं’ पर ध्यान दें। उन्होंने निष्कर्ष के तौर पर कहा, “गुणवत्ता और स्थिरता को अब हमारी विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं का अनिवार्य हिस्सा बनाना ही होगा।”
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