एशियाई खेलों में ‘स्वर्ण’ जीतकर लौटीं हॉकी की शेरनियां, रांची में पलकें बिछाकर हुआ भव्य स्वागत।

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इतिहास रचकर लौटीं हॉकी की शेरनियां: 44 साल का सूखा खत्म, सलीमा की कप्तानी में भारत ने फहराया परचम

रांची: भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियाई खेलों में इतिहास रचते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया है। रविवार को अपनी जीत का अनुभव साझा करते हुए कप्तान सलीमा टेटे ने कहा कि मजबूत चीन के सामने होने के बावजूद टीम का आत्मविश्वास अडिग था। भारत ने जापान में खेले गए फाइनल मुकाबले में डिफेंडिंग चैंपियन चीन को 1-0 से मात देकर 44 साल बाद एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस स्वर्णिम जीत के साथ ही भारतीय टीम ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए अपना टिकट भी पक्का कर लिया है।

पीटीआई वीडियो से बातचीत में टेटे ने गर्व के साथ कहा, “हम इस जीत के हकदार थे। हमें अपनी टीम और खिलाड़ियों के कौशल पर पूरा भरोसा था कि इस बार सोना हमारा ही होगा। चीन ने कड़ी चुनौती पेश की, लेकिन उस एक गोल की बढ़त को अंत तक बरकरार रखना और देश के लिए स्वर्ण जीतना हमारे लिए सबसे गौरवशाली पल है।”

विशेष बात यह है कि इस स्वर्णिम सफलता में झारखंड का बड़ा योगदान है। टीम की चार प्रमुख खिलाड़ी—सलीमा टेटे, ब्यूटी डुंगडुंग और दीपिका सोरेंग (सिमडेगा) के साथ-साथ निक्की प्रधान (खूंटी)—इसी राज्य की मिट्टी से निकली हैं। रांची हवाई अड्डे पर जब ये चैंपियन बेटियां उतरीं, तो वहां का नजारा उत्सव जैसा था। दीपिका सोरेंग ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “एशियाई खेलों में स्वर्ण और ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना किसी सपने के सच होने जैसा है। चीन जैसी टीम के खिलाफ बढ़त बचाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन हमारी लंबी मेहनत रंग लाई।”

अनुभवी खिलाड़ी निक्की प्रधान ने बताया कि टोक्यो ओलंपिक में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किए गए दमदार रक्षात्मक खेल ने टीम को मानसिक मजबूती दी है, जो अब अगले ओलंपिक की तैयारी में काम आएगी। हवाई अड्डे पर खिलाड़ियों का स्वागत पारंपरिक ‘मांदर’ की थाप और नृत्य के साथ किया गया, जहां बड़ी संख्या में कोच और युवा खिलाड़ी मौजूद थे।

इस सफलता के पीछे छिपे संघर्ष की कहानी निक्की प्रधान की मां जीतन देवी ने बयां की। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “शुरुआत में हमें हॉकी के बारे में कुछ पता नहीं था। हम निक्की को खेलने से रोकते थे, लेकिन मास्टर दशरथ के प्रोत्साहन ने उसे रुकने नहीं दिया। आज हमें अपनी बेटी पर बेहद गर्व है।” वहीं, सलीमा टेटे के पिता सुलक्षण टेटे ने अपनी बेटी के वर्षों के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि यह जीत सिर्फ परिवार की नहीं, बल्कि पूरे देश और झारखंड की जीत है। उनकी बेटी ने मेहनत के दम पर राज्य का नाम पूरी दुनिया में रोशन कर दिया है।


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