**JPSC महाघोटाला: अब 21 परीक्षाएं CID की रडार पर, कुर्सी पा चुके 462 अफसरों को समन की तैयारी!**
झारखंड में JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) की परीक्षाओं में हुआ कथित मेधा घोटाला अब एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ा हुआ है, जिसने पूरी राज्य व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। राज्य की भर्तियों पर उठते सवालों के बीच जांच का दायरा अब इतना विस्तृत हो गया है कि अब सिर्फ अभ्यर्थी ही नहीं, बल्कि सालों से नौकरी कर रहे अधिकारी भी कानून के शिकंजे में आने वाले हैं। सीआईडी (CID) ने अब तक की अपनी सबसे बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है, जिसके तहत 18 और परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है।
अब तक जांच की सुई सिर्फ JPSC 14वीं, FRO और ACF परीक्षाओं तक सीमित थी, लेकिन अब इसमें फूड सेफ्टी ऑफिसर, CDPO और सिविल सेवा परीक्षा 2023 को भी शामिल कर लिया गया है। इन तीन प्रमुख परीक्षाओं के जरिए 462 पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं, जिन्हें अब CID के कड़े सवालों का सामना करना होगा।
OMR शीट में हेरफेर से पेपर लीक तक: गहरी है साजिश
मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के द्वारा आयोजित JPSC की सभी 21 परीक्षाएं अब संदेह के घेरे में हैं। CID ने इन सभी परीक्षाओं के महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया है। जांच का मुख्य केंद्र पेपर लीक, OMR शीट में की गई संदिग्ध हेराफेरी और ‘सेटिंग’ के जरिए अयोग्य अभ्यर्थियों को पास कराने के गंभीर आरोप हैं।
इन परीक्षाओं पर मंडरा रहे हैं जांच के बादल
CID की कार्रवाई का अगला चरण बेहद व्यापक होने वाला है। जांच टीम अब इन परीक्षाओं के सफल अभ्यर्थियों की कुंडली खंगाल रही है:
- प्रशासनिक सेवाएं: झारखंड सिविल सेवा संयुक्त परीक्षा 2023, सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा 2023 और 2025।
- विशेषज्ञ पद: फूड सेफ्टी ऑफिसर, सहायक निदेशक, ड्रग इंस्पेक्टर और सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर।
- शिक्षा क्षेत्र: इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में प्राध्यापकों की नियुक्ति (2025 और 2026)।
- न्यायिक व अन्य: सिविल जज जूनियर डिविजन (2023), ACF-FRO (2024), झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) 2024 और छठी सीमित उपसमाहर्ता परीक्षा 2018।
- विश्वविद्यालय: गैर-शैक्षणिक पदों पर की गई नियुक्तियां।
अब तक 27 गिरफ्तार: सलाखों के पीछे पहुंचे ‘बड़े खिलाड़ी’
इस घोटाले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि CID अब तक 27 आरोपियों को जेल भेज चुकी है। इसमें JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं।
जांच के दौरान ‘सेटिंग’ के जरिए सफलता पाने के आरोप में सुमन सौरभ, दीपक राणा, ओमप्रकाश राणा, उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार और रक्षक सिंह जैसे अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, सहायक वन संरक्षक (ACF) और वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) परीक्षा के सफल अभ्यर्थी ऋतिक रौशन और पंकज प्रसून्न भी फिलहाल जेल की हवा खा रहे हैं।
नया मोड़: छात्र आंदोलन की क्राउड फंडिंग भी संदेह में
जांच के दौरान एक चौंकाने वाली शिकायत भी सामने आई है। CID को मिली एक शिकायत के अनुसार, JPSC-JSSC नियुक्ति घोटाले के खिलाफ हुए छात्र आंदोलनों के लिए करोड़ों रुपये की ‘क्राउड फंडिंग’ की गई थी। इस शिकायत में मांग की गई है कि इन रुपयों के स्रोत और खर्च की बारीकी से जांच हो। हालांकि, फिलहाल CID ने आधिकारिक तौर पर इस पहलू पर जांच शुरू होने की पुष्टि नहीं की है।
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