उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के बीच बीजेपी के आठ उम्मीदवारों के नामांकन ने प्रदेश की सियासत को नया मोड़ दे दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में हुए नामांकन में एनडीए के सहयोगी दलों के प्रमुख चेहरे भी नजर आए। इसी बीच अखिलेश यादव ने साफ कर दिया कि सपा का फोकस अब राज्यसभा की तीसरी सीट के बजाय 2027 के विधानसभा चुनाव पर है।
बीजेपी के नामांकन में दिखा एनडीए का शक्ति प्रदर्शन
6 अक्टूबर को बीजेपी के सभी आठ उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। कार्यक्रम में अपना दल (सोनेलाल) के नेता और मंत्री आशीष पटेल तथा निषाद पार्टी के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद भी मौजूद रहे। इसके अलावा बीजेपी और सहयोगी दलों के कई मंत्री व वरिष्ठ नेता भी नामांकन के दौरान साथ दिखाई दिए।
सियासी तौर पर इस मौजूदगी को बीजेपी की ओर से एनडीए की एकजुटता दिखाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, किसी नेता की मौजूदगी को भविष्य के मतदान व्यवहार की अंतिम गारंटी नहीं माना जा सकता।
सपा के तीसरे उम्मीदवार की रणनीति पर लगा विराम
राज्यसभा चुनाव में सपा तीसरा उम्मीदवार उतारकर बीजेपी के अतिरिक्त वोटों और संभावित क्रॉस-वोटिंग के जरिए मुकाबला खड़ा करने की कोशिश कर सकती है, ऐसी अटकलें थीं। अखिलेश यादव ने पहले भी संकेत दिया था कि पर्याप्त संख्या बल मिलने पर तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारा जा सकता है।
लेकिन नामांकन की अंतिम तारीख पर अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अब हमारा ध्यान तीन पर नहीं, बल्कि 403 पर है।” इस बयान को सपा के तीसरे उम्मीदवार से पीछे हटने और 2027 विधानसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित करने के संकेत के तौर पर देखा गया।
बागी विधायकों को लेकर भी सपा की चुनौती
तीसरे उम्मीदवार के लिए सपा को अपने मौजूदा विधायकों के अलावा अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ती। पिछली राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया में सपा के कुछ विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की थी। राकेश सिंह और अभय सिंह समेत कुछ ऐसे चेहरे अब सपा के साथ नहीं हैं, जबकि कुछ अन्य विधायक अभी भी पार्टी के भीतर हैं।
ऐसे में सपा के सामने तीसरा उम्मीदवार उतारने पर जीत की संख्या जुटाने के साथ-साथ क्रॉस-वोटिंग का जोखिम भी था। यही वजह है कि राज्यसभा की तीसरी सीट पर मुकाबला कराने के बजाय पार्टी ने फिलहाल विधानसभा चुनाव को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है।
बीजेपी ने सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण भी साधे
बीजेपी ने यूपी की आठ राज्यसभा सीटों के लिए धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है। इनमें तीन उम्मीदवार ओबीसी, दो अनुसूचित जाति और तीन सामान्य वर्ग से बताए जा रहे हैं। दो महिला उम्मीदवारों को भी जगह मिली है।
पार्टी के चयन को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक, क्षेत्रीय और संगठनात्मक संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। बीजेपी ने इस बार अपने मौजूदा राज्यसभा सदस्यों में से किसी को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया है।
अखिलेश के बयान पर बीजेपी का पलटवार
अखिलेश यादव के 403 सीटों वाले बयान पर बीजेपी ने भी प्रतिक्रिया दी। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इसे सपा की रणनीति और 2027 की चुनावी तैयारी से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी ने विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी दिशा तय कर ली है।
वहीं, बीजेपी उम्मीदवार प्रकाश पाल ने नामांकन के बाद कहा कि उम्मीदवारों का चयन दिखाता है कि बीजेपी ही वास्तव में ‘पीडीए’ का सम्मान करती है। उन्होंने सपा के PDA विमर्श को लेकर भी सवाल उठाए। यह बीजेपी नेता का राजनीतिक दावा है, जिसे चुनावी माहौल में सपा की सामाजिक राजनीति के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
अब आगे क्या होगा?
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर को निर्धारित है। नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच और 9 अक्टूबर को नाम वापसी की अंतिम तारीख है। यदि तीसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं आता है और कोई अन्य बदलाव नहीं होता, तो 10 सीटों पर 10 उम्मीदवार होने के कारण चुनाव की नौबत नहीं आएगी और सभी निर्विरोध चुने जा सकते हैं।
राज्यसभा चुनाव की इस तस्वीर के बाद यूपी की राजनीति का फोकस अब तेजी से 2027 विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अखिलेश यादव का 403 सीटों का जिक्र इसी बड़े चुनावी लक्ष्य का संकेत माना जा रहा है, जबकि बीजेपी अपने सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को मजबूत करने में जुटी है।
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