नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हाल की कुछ घटनाओं का हवाला देते हुए, देश में “आरएसएस-बीजेपी की सामंतवादी सोच” के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई है। उन्होंने इन घटनाओं को केवल व्यक्तिगत वारदात न मानते हुए, पूरे सामाजिक ताने-बाने पर एक सुनियोजित हमले के रूप में देखा है।
खड़गे ने अपनी बातों के समर्थन में कई ठोस उदाहरण पेश किए, जिनमें शामिल हैं:
- हरियाणा में एक IPS अधिकारी के साथ जातिगत भेदभाव का मामला: यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था में भी जातिगत पूर्वाग्रहों की गहरी जड़ों को उजागर करती है।
- हरिओम वाल्मीकि की कथित प्रताड़ना: यह मामला समाज के वंचित तबके पर हो रहे अन्याय का एक और दुखद उदाहरण है।
- सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) पर हमला और उसे जायज़ ठहराना: यह कृत्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा पर सीधा आघात है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरनाक है।
- राजस्थान के सवाई माधोपुर में दलित बुजुर्ग महिला कमला देवी रैगर पर अत्याचार: यह घटना दर्शाती है कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग आज भी किस हद तक हिंसा और अपमान का शिकार हो रहे हैं।
खड़गे का मानना है कि ये सभी घटनाएं अलग-अलग नहीं हैं, बल्कि एक ही व्यापक एजेंडे का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य समाज को बांटना और कुछ खास वर्गों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह की सोच का मुकाबला करना देश के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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