खतरे की घंटी: एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में जानलेवा थीं सुरक्षा खामियां, डॉ. धाकड़ की चेतावनियों को किया नजरअंदाज
एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। एक वरिष्ठ चिकित्सक, डॉ. धाकड़, ने साफ तौर पर दावा किया है कि उन्होंने अस्पताल प्रशासन को बार-बार आगाह किया था कि अस्पताल की बिल्डिंग में जानलेवा खामियां मौजूद हैं, लेकिन उनकी चेतावनियों को अनसुना कर दिया गया।
डॉ. धाकड़ के अनुसार, उन्होंने एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक और अन्य संबंधित अधिकारियों को अनेक बार पत्र लिखकर सूचित किया था कि ट्रॉमा सेंटर की दीवारों में बिजली का करंट दौड़ रहा है, छत से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है और बिजली के पैनलों में गंभीर खराबी आ गई है। इन सभी कारणों से, ट्रॉमा सेंटर मरीजों और कर्मचारियों के लिए बेहद असुरक्षित हो गया था।
यह चिंताजनक बात है कि इन गंभीर सुरक्षा उल्लंघनों के बावजूद, अस्पताल प्रबंधन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। डॉ. धाकड़ द्वारा लिखे गए सबसे हालिया पत्र, जो दुर्भाग्यपूर्ण अग्निकांड से ठीक दो दिन पहले, यानी तीन अक्टूबर को लिखा गया था, में भी उन्होंने वार्ड की दीवारों में सीलन और बिजली के पैनलों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की थी।
उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा था, “ऊपरी मंजिल पर न्यूरो ऑपरेशन थिएटर के चल रहे निर्माण कार्य के कारण वीआरवी सिस्टम, डक्ट और इलेक्ट्रिकल पैनल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मलबा गिरने से इनके और क्षतिग्रस्त होने की प्रबल आशंका है। अगर इनमें से कोई भी मशीनरी क्षतिग्रस्त होती है तो पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।”
यह घटना पहली बार नहीं थी जब डॉ. धाकड़ ने ऐसी चेतावनी दी हो। पिछले महीने भी उन्होंने एक पत्र के माध्यम से अवगत कराया था कि ऊपर चल रहे निर्माण क्षेत्र से बारिश का पानी ऑपरेशन थिएटर के अंदर रिस रहा है, जिससे एक खतरनाक स्थिति उत्पन्न हो रही है।
नौ सितंबर को लिखे गए एक अन्य पत्र में उन्होंने इस खतरे को और भी स्पष्ट किया था। उन्होंने लिखा था, “सीलन की वजह से ऑपरेशन थिएटर की दीवारों और स्विच बोर्ड में करंट फैल रहा है। इससे चिकित्सकों, कर्मचारियों और मरीजों के लिए अनहोनी की आशंका बनी रहती है।”
यह खुलासे स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि एसएमएस अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर एक बड़े हादसे का शिकार हो सकता था, और यदि उस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाता तो इसका परिणाम और भी भयावह हो सकता था। यह घटना अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही और सुरक्षा मानकों के प्रति लापरवाही पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
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