जयपुर. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर राज्य की भजनलाल सरकार पर निशाना साधा है. इस संबंध में आज गहलोत ने एक्स के माध्यम से कहा कि राज्य सरकार के लिए पंचायत और निकाय चुनाव में जानबूझ कर की जा रही देरी से ज्यादा शर्मनाक क्या हो सकता है, जहां माननीय उच्च न्यायालय को यहां तक कहना पड़ा कि ‘अगर आयोग चुनाव नहीं करा सकता तो हमें बता दे, जज चुनाव करा देंगे.’ यह सरकार की घोर प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है.
राज्य निर्वाचन आयोग का यह बयान बेहद गंभीर और चिंताजनक है कि पंचायती राज विभाग को 6 पत्र लिखने के बावजूद एससी, एसटी, ओबीसी और महिला आरक्षण से संबंधित जानकारी नहीं दी गई. इससे साफ पता चलता है कि पंचायती राज विभाग ने सरकार के दबाव में ऐसा किया है और सरकार की मंशा चुनाव कराने की नहीं है और वह संवैधानिक संस्थाओं को पंगु बना रही है.
बार-बार माननीय न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करना संविधान एवं न्यायपालिका का सीधा अपमान है। जो सरकार न्यायपालिका का सम्मान नहीं कर सकती और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को रोक सकती है, उसे एक पल भी सत्ता में बने रहने का नैतिक और संवैधानिक अधिकार नहीं है। यह स्थिति लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है.
पीसी:राजस्थान.एनडीटीवी
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