गोवा में खूंटी के युवा की दुखद मौत: परिवार को सरकारी मदद का सहारा
गोवा में एक प्रवासी श्रमिक की दुखद मृत्यु ने खूंटी के एक गरीब परिवार को गहरा सदमा पहुंचाया है। मृतक, आलोक आइंद, नौकरी की तलाश में अपने दोस्तों के साथ गोवा गया था, लेकिन वहां उसकी जान चली गई। परिवार के पास अब शव को वापस लाने के लिए पैसे नहीं हैं, और उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
वित्तीय सहायता की उम्मीद:
आलोक के परिवार ने गोवा से शव वापस लाने के लिए आर्थिक मदद की मांग की है। धन की कमी के कारण वे इस कठिन घड़ी में असहाय महसूस कर रहे हैं। झारखंड श्रम विभाग ने उनकी पुकार सुनी है और इस दुखद मामले में सहायता के लिए आगे आया है। खूंटी की उपायुक्त (डीसी) आर रोनिता ने बताया कि गरीब परिवार की दुर्दशा को देखते हुए, उन्होंने श्रम विभाग से मृतक के शव को वापस लाने के लिए वित्तीय सहायता की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।
जरियागढ़ का लाल, गोवा में खोया:
मृतक, आलोक आइंद, 27 वर्ष का था और खूंटी जिले के जरियागढ़ थाना क्षेत्र के सिमटीमाडा का निवासी था। उसने इसी साल अगस्त में अपनी बहन को बताए बिना, रोजगार की तलाश में अपने दोस्तों के साथ गोवा का रुख किया था। दुख की बात यह है कि उसके माता-पिता का कुछ साल पहले निधन हो गया था, और अब वह इस दुनिया में नहीं रहा।
अंतिम समय की व्यथा:
आलोक की बहन, स्वर्णलता आइंद, ने बताया कि नौकरी मिलने के बाद आलोक ने मोबाइल फोन खरीदा था। उसने फोन पर बताया था कि उसे एक निजी निर्माण कंपनी में नौकरी मिल गई है। लेकिन मंगलवार शाम को, ठेकेदार ने उन्हें सूचित किया कि आलोक को गंभीर सिरदर्द और पेट दर्द की शिकायत के बाद दौरे पड़ने लगे थे। उसे तत्काल एक अस्पताल ले जाया गया, जहां मडगांव के एक अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया।
श्रम विभाग सक्रिय, ठेकेदार से संपर्क:
प्रवासी नियंत्रण प्रकोष्ठ (झारखंड श्रम विभाग) की टीम लीडर शिखा लकड़ा ने बताया कि गोवा में निजी ठेकेदार से संपर्क स्थापित हो चुका है। ठेकेदार ने शव को विमान से रांची भेजने के लिए कुछ खर्च उठाने पर सहमति जताई है। श्रम विभाग मृतक के परिवार को शव पहुंचाने के शेष खर्च का भुगतान जल्द ही करेगा।
विमान से घर वापसी की तैयारी:
स्वर्णलता ने बताया कि उन्हें गुरुवार को सूचित किया गया कि पोस्टमार्टम हो गया है और शव को विमान से झारखंड भेजा जाएगा। परिवार परिवहन कंपनी को ₹17,000 का भुगतान करेगा, और शव के रांची पहुंचने के बाद राज्य श्रम विभाग यह राशि उन्हें वापस कर देगा।
न्याय की पुकार:
इससे पहले, बुधवार को स्वर्णलता ने मडगांव पुलिस को एक पत्र लिखकर अपनी आर्थिक तंगी और शव को वापस लाने में असमर्थता जताई थी। उन्होंने कहा था कि माता-पिता की मृत्यु के बाद, वे अपने खेतों में काम करके किसी तरह गुजारा कर रहे हैं, और गोवा जाकर शव लाने की स्थिति में नहीं हैं।
इस दुखद घटना ने प्रवासी श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों को फिर से उजागर किया है। सरकारी सहायता से आलोक के परिवार को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन इस युवा की अनमोल जान का जाना एक अपूरणीय क्षति है।
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