गोरखपुर: डी.डी.यू. विश्वविद्यालय ने बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में रचा इतिहास, नवाचार की नई मिसाल
गोरखपुर: डॉ. पूनम टंडन के कुशल नेतृत्व में, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डी.डी.यू. विश्वविद्यालय) ने शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय की नवीन छात्र-शिक्षक केंद्रित IPR नीति के सफल क्रियान्वयन से न केवल पेटेंट और कॉपीराइट की संख्या में शानदार वृद्धि हुई है, बल्कि शोध और नवाचार की गुणवत्ता को भी नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है।
पेटेंट और कॉपीराइट की बेमिसाल उपलब्धियां:
30 सितंबर, 2025 तक, विश्वविद्यालय ने कुल 64 पेटेंट दाखिल किए हैं, जिनमें से 57 प्रकाशित हो चुके हैं और 25 अभी भी प्रक्रियाधीन हैं। इन उपलब्धियों में विभिन्न विभागों का सराहनीय योगदान रहा है:
- जैव प्रौद्योगिकी विभाग: 17 प्रकाशित पेटेंट के साथ अग्रणी।
- प्राणीशास्त्र विभाग: 13 प्रकाशित पेटेंट।
- वनस्पति शास्त्र विभाग: 9 प्रकाशित पेटेंट।
- रसायन शास्त्र विभाग: 8 प्रकाशित पेटेंट।
- भौतिकी विभाग: 6 प्रकाशित पेटेंट।
- इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान: 2 प्रकाशित पेटेंट।
- होम साइंस विभाग: 1 प्रकाशित पेटेंट।
- होटल प्रबंधन एवं कैटरिंग टेक्नोलॉजी संस्थान: 1 प्रकाशित पेटेंट।
इसके साथ ही, वर्ष 2024-25 में विश्वविद्यालय ने पहली बार 32 कॉपीराइट आवेदन किए, जिनमें से 15 पंजीकृत हुए। इन पंजीकृत कॉपीराइट में जैव प्रौद्योगिकी विभाग (7), अर्थशास्त्र विभाग (4), वनस्पति शास्त्र विभाग (3), और गणित एवं सांख्यिकी विभाग (1) का विशेष योगदान रहा।
वर्षवार वृद्धि: एक निरंतर प्रगतिशील यात्रा:
IPR के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की प्रगति स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है:
- 2021: 1 पेटेंट प्रकाशित।
- 2022: 7 पेटेंट प्रकाशित।
- 2023: 26 पेटेंट प्रकाशित।
- 2024-25: 64 पेटेंट दाखिल (57 प्रकाशित)।
- कॉपीराइट: केवल 2024-25 में शुरुआत, 15 पंजीकृत।
नीति और जागरूकता: नवाचार का संबल:
विश्वविद्यालय पेटेंट/कॉपीराइट दाखिल करने के लिए वित्तीय सहयोग और विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है। प्रकाशन से पूर्व आविष्कार की अनिवार्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। IPR सेल और अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ द्वारा नियमित रूप से कार्यशालाएँ आयोजित की जा रही हैं। CST उत्तर प्रदेश से अनुदान के साथ नवंबर 2025 में एक दिवसीय कार्यशाला प्रस्तावित है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भविष्य की दिशा:
यह उपलब्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप है, जो बहुविषयक शिक्षा, शोध और नवाचार पर बल देती है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य NIRF की शीर्ष 100 संस्थाओं में स्थान पाना, QS World Ranking में अपनी पहचान बनाना, और छात्रों को स्नातक स्तर से शोध स्तर तक नवाचार और उद्यमिता के लिए प्रेरित करना है। विश्वविद्यालय अपने प्रयासों को सरकार की PM-USHA योजना के अंतर्गत MERU (Multidisciplinary Education and Research University) की दिशा से भी जोड़ रहा है।
अगले कदम: ‘लैब टू लैंड’ की ओर बढ़ते कदम:
प्रधानमंत्री जी की "Lab to Land" दृष्टि और राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन के अनुरूप, विश्वविद्यालय अब दर्ज पेटेंट एवं कॉपीराइट का वाणिज्यीकरण, नवीन उत्पादों और सेवाओं का विकास, और स्टार्टअप व उद्योग-शैक्षणिक सहयोग की दिशा में ठोस पहल करेगा। इसका उद्देश्य शोध और नवाचार को सीधे समाज और उद्योग तक पहुँचाना है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन का वक्तव्य:
"दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने शोध और नवाचार को केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित न रखकर उन्हें समाज व उद्योग तक पहुँचाने की ठोस पहल की है। हमारी IPR नीति विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में नई पहचान दिलाएगी।"
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