दीपावली का सन्नाटा: सम्मू गांव की अनोखी दास्तान
जब जगमगाहट और उल्लास से भरी दीपावली आती है, तो सम्मू गांव में एक अनूठी खामोशी छा जाती है। विद्या देवी की जुबानी, “दीपावली का नाम सुनते ही मन भारी हो जाता है। चारों ओर दीयों की रोशनी और खुशियों की गूंज होती है, लेकिन हमारे गांव में उस दिन एक गहरा सन्नाटा पसरा रहता है। बच्चे भी घरों में सिमट कर, चुपचाप रहते हैं। दीपावली के दिन हमारे घरों में न दीये जलते हैं, न ही पकवानों की महक फैलती है।”
इस गांव की इस असामान्य स्थिति की पुष्टि करते हुए भोरंज पंचायत प्रधान, पूजा देवी ने बताया, “आज तक सम्मू गांव में दीपावली का पर्व कभी नहीं मनाया गया है। यह गांव आज भी एक प्राचीन श्राप के भय में जी रहा है। लोग न तो पकवान बनाते हैं और न ही पटाखों की आवाज सुनाई देती है। हर साल यही सवाल उठता है कि आखिर कब इस गांव को इस श्राप से मुक्ति मिलेगी और वे भी दूसरों की तरह दीपावली का आनंद ले पाएंगे।”
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