सुधारात्मक याचिका स्वीकार: सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ का ऐतिहासिक फैसला
भारत के सर्वोच्च न्यायालय में आज एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया गया, जिसने सुधारात्मक याचिका के संदर्भ में एक नई मिसाल कायम की। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी आर गवई के नेतृत्व वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ भी शामिल थे, ने कोली द्वारा दायर सुधारात्मक याचिका पर खुली अदालत में विस्तृत सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने अत्यंत संक्षेप में, लेकिन निर्णायक शब्दों में, पीठ के फैसले को सार्वजनिक किया। उन्होंने कहा, “उपर्युक्त कारणों से सुधारात्मक याचिका स्वीकार की जाती है।” यह संक्षिप्त घोषणा इस मामले के महत्व और पीठ द्वारा दिए गए गहन विश्लेषण को दर्शाती है, जिसने अंततः याचिका को स्वीकार करने का मार्ग प्रशस्त किया।
यह फैसला न केवल कोली के मामले के लिए निर्णायक है, बल्कि भविष्य में सुधारात्मक याचिकाओं के निपटारे के लिए भी एक महत्वपूर्ण नजीर पेश करेगा। सीजेआई की अध्यक्षता वाली यह पीठ, अपने विवेक और न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए, इस संवेदनशील मामले पर अपने विस्तृत विचार-विमर्श के उपरांत इस नतीजे पर पहुँची।
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