
Bihar Police Operation Red light आठ अक्तूबर 2026 की सुबह करीब आठ बजे पूर्वी चंपारण जिले (मोतिहारी) के केसरिया थाने में एक महिला बदहवास हालत में पहुंची. वह थानाध्यक्ष राहुल को तलाश रही थी. जैसे ही थानाध्यक्ष उसके सामने आये, महिला फूट-फूटकर रोने लगी. उसने मोबाइल में एक नंबर दिखाते हुए गुहार लगायी- साहेब, मेरी बेटी को बचा लीजिए. वह बहुत बुरी जगह फंस गयी है. उसे वहां से निकाल लीजिए.
दरअसल, कुछ देर पहले ही महिला की बेटी ने फोन कर मदद मांगी थी. उसने बताया था कि उसे जबरन गलत काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है. इतना कहने के बाद फोन कट गया. इसके बाद से बेटी से संपर्क नहीं हो पा रहा था. वह कहां है और किस हाल में है, इसकी कोई जानकारी नहीं थी. मां के पास बेटी को बचाने के लिए सिर्फ एक मोबाइल नंबर था और आखिरी उम्मीद पुलिस से थी.
महिला की बात सुनते ही थानाध्यक्ष राहुल ने बिना देर किये कार्रवाई शुरू कर दी. उन्होंने सब इंस्पेक्टर मनोज ठाकुर, राजकुमार राजू, सोनू कुमार और महिला पुलिसकर्मी सुनीता कुमारी को शामिल करते हुए एक टीम गठित की. महिला की ओर से उपलब्ध कराये गये मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लिया गया, तो उसकी लोकेशन पश्चिम बंगाल के पोंजीपोड़ा रेडलाइट एरिया में मिली. इसके बाद पुलिस को अंदाजा हो गया कि युवती को देह व्यापार के धंधे में धकेल दिया गया है.
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500 किलोमीटर का सफर तय कर बंगाल पहुंची पुलिस टीम
लोकेशन मिलने के बाद पुलिस टीम ने पीड़िता के पिता को साथ लिया और उसी दिन पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हो गयी. केसरिया से करीब 500 किलोमीटर की दूरी तय कर टीम पोंजीपोड़ा पहुंची. हालांकि, वहां पहुंचने के बाद सबसे बड़ी चुनौती युवती तक पहुंचना और उसकी सुरक्षित बरामदगी करना था.
बंगाल पहुंचने के बाद पुलिस टीम ने कुछ देर आराम किया. इसके बाद शाम होते ही तय रणनीति के अनुसार रेडलाइट एरिया में पहुंच गयी. सब इंस्पेक्टर मनोज ठाकुर सादे कपड़ों में इलाके के बाहर तैनात हो गये, जबकि टीम के अन्य सदस्य आसपास रहकर पूरे घटनाक्रम पर नजर रखने लगे.
मां की एक कॉल और पुलिस का एक्शन
50 रुपये देकर दलाल के साथ इलाके में घूमे सब इंस्पेक्टर
इसी दौरान एक अधेड़ व्यक्ति मनोज ठाकुर के पास पहुंचा और पूछने लगा- क्या चाहिए साहेब? कैसी लड़की चाहिए? मुझे 50 रुपये दीजिए, पूरा बाजार घुमा देता हूं. जो लड़की पसंद आये, उसे तय कर लीजिए.
मनोज ठाकुर को इसी मौके का इंतजार था. उन्होंने उस व्यक्ति को 50 रुपये दिये और उसके साथ इलाके में आगे बढ़ गये. दलाल उन्हें एक गली से दूसरी गली तक घुमाने लगा. वह बार-बार पूछ रहा था कि कोई लड़की पसंद आयी या नहीं. तीसरी गली पार करने के बाद मनोज ठाकुर एक जगह रुक गये. उन्होंने वहां मौजूद एक युवती की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्हें वही लड़की चाहिए.
इसके बाद दलाल उन्हें कोठे की संचालिका लक्की के पास ले गया. लक्की ने युवती को उपलब्ध कराने के बदले दो हजार रुपये मांगे. मनोज ठाकुर ने 500 रुपये देने की बात कही. काफी देर तक मोलभाव हुआ और अंत में एक हजार रुपये में सौदा तय हुआ.
50 रुपये देकर दलाल के साथ घूमे सब इंस्पेक्टर
मोबाइल जमा कराने की शर्त पर अड़ी कोठे की संचालिका
पैसे देने के बाद जैसे ही मनोज ठाकुर अंदर जाने लगे, कोठे की संचालिका लक्की ने उनसे मोबाइल फोन जमा कराने को कहा. मनोज ठाकुर इसके लिए तैयार नहीं हुए. इस बात को लेकर दोनों के बीच बहस होने लगी. लक्की बिना मोबाइल जमा कराये उन्हें अंदर जाने देने को तैयार नहीं थी, जबकि मनोज ठाकुर अपना मोबाइल छोड़ना नहीं चाहते थे. आखिरकार उन्हें वहां से बाहर निकलना पड़ा.
हालांकि, उन्होंने बातचीत के जरिये लक्की को उलझाये रखा. इसी बीच पुलिस की बाकी टीम स्थानीय पुलिस के सहयोग से मौके पर पहुंच गयी. पुलिस टीम को देखते ही रेडलाइट एरिया में अफरा-तफरी मच गयी. वहां मौजूद कई महिलाएं और अन्य लोग इधर-उधर भागने लगे. इसी दौरान मनोज ठाकुर कोठे के अंदर पहुंचे और पीड़िता को सुरक्षित बाहर निकाल लिया.
इस तरह मां की गुहार पर करीब 500 किलोमीटर दूर पहुंची केसरिया पुलिस की टीम युवती को बचाने में सफल रही. इसके बाद पुलिस टीम पीड़िता को लेकर मोतिहारी लौट आयी.
2000 से शुरू हुई बात 1000 रुपये पर तय हुआ सौदा
पड़ोसी रोहित ने शादी का झांसा देकर मंडी में बेच दिया
पुलिस के सामने पीड़िता ने जो आपबीती सुनायी, वह चौंकाने वाली थी. उसके मुताबिक, पड़ोस में रहने वाले रोहित से उसकी जान-पहचान थी. धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत और मुलाकातें बढ़ने लगीं. इसी दौरान रोहित ने उसके सामने शादी का प्रस्ताव रखा. उसके झांसे में आकर युवती घर छोड़कर चली गयी.
पीड़िता ने बताया कि रोहित ने उसे मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर मिलने के लिए बुलाया था. वह तय समय पर स्टेशन पहुंच गयी, लेकिन रोहित खुद वहां नहीं आया. कुछ देर बाद उसके दो दोस्त पहुंचे. उन्होंने युवती से कहा कि रोहित ने उन्हें उसे लेने के लिए भेजा है.
रोहित का नाम सुनकर युवती को उन पर भरोसा हो गया और वह उनके साथ चली गयी. दोनों उसे मुजफ्फरपुर से पूर्णिया ले गये, जहां उन्होंने उसे रानी नाम की एक महिला के हवाले कर दिया.
रोहित ने शादी का झांसा देकर रची साजिश
पहले भरोसा जीता, फिर खाने के बाद हो गयी बेहोश
पीड़िता के मुताबिक, रानी ने शुरुआत में उसका भरोसा जीतने की कोशिश की. उसे अच्छा खाना खिलाया गया और कहा गया कि अगले दिन रोहित से उसकी शादी करा दी जायेगी. युवती को लगा कि अब उसकी शादी होने वाली है. लेकिन रात में खाना खाने के बाद वह बेहोश हो गयी.
जब उसे होश आया, तो उसने खुद को पश्चिम बंगाल के रेडलाइट एरिया में पाया. वहां उसे जबरन गलत काम करने के लिए मजबूर किया जाने लगा. इसी दौरान उसने किसी तरह अपनी मां को फोन किया और मदद की गुहार लगायी. इसके बाद फोन कट गया. मां की शिकायत पर केसरिया पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और आखिरकार उसे वहां से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
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