पश्चिम बंगाल में एसआईआर का बढ़ता संकट: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से की तत्काल कार्रवाई की मांग
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक कड़ा पत्र लिखा है। उन्होंने इस कवायद को न केवल अव्यवस्थित और अराजक करार दिया है, बल्कि इसे खतरनाक और चिंताजनक स्तर तक पहुंचने वाला बताया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि एसआईआर के कुप्रबंधन के कारण मानवीय क्षति असहनीय हो गई है।
त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया और मानवीय त्रासदी
ममता बनर्जी ने पत्र में विस्तार से बताया कि कैसे तीन महीनों में वह काम थोपा जा रहा है, जो पहले तीन साल में पूरा होता था। इससे पूरा सिस्टम चरमरा गया है। उन्होंने बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) पर अत्यधिक बोझ डाले जाने की ओर इशारा किया, जिससे वे अपनी मानवीय क्षमता से अधिक काम करने को मजबूर हैं। प्रशिक्षण की कमी, सर्वर की लगातार विफलता, ऑनलाइन फॉर्म भरने में आने वाली कठिनाइयाँ और नामुमकिन समय-सीमा जैसी समस्याएं इस प्रक्रिया को और जटिल बना रही हैं।
एक जीवन का दर्दनाक अंत और बढ़ता असंतोष
मुख्यमंत्री ने जलपाईगुड़ी के माल इलाके में एक आंगनवाड़ी वर्कर द्वारा एसआईआर के भारी दबाव में आत्महत्या करने का उदाहरण पेश किया। उन्होंने बताया कि इस दुखद घटना के बाद से कई और लोगों की जान जा चुकी है, जो इस बात का प्रमाण है कि यह केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ है। इस समय पश्चिम बंगाल में धान की कटाई और आलू की बुआई का पीक सीजन चल रहा है, जिसमें लाखों किसान-मजदूर खेतों में व्यस्त हैं। ऐसे में उनसे घर बैठकर फॉर्म भरने की उम्मीद करना अव्यावहारिक है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी पर डराने-धमकाने और एसआईआर में शामिल बीएलओ को गलत कारण बताओ नोटिस जारी करने का भी आरोप लगाया।
लोकतंत्र की नींव को खतरा
ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया देश की लोकतांत्रिक नींव को हिला रही है। गलत या अधूरी प्रविष्टियों के डर से लाखों वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से काटे जा सकते हैं। बीएलओ और आम जनता पर डाला जा रहा दबाव असहनीय है।
तत्काल हस्तक्षेप की अपील
मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त से तत्काल इस प्रक्रिया को रोकने, उचित प्रशिक्षण और सहायता प्रदान करने, समय-सीमा बढ़ाने और पूरी प्रक्रिया की फिर से समीक्षा करने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो इसके परिणाम भयानक होंगे और लोकतंत्र की साख को गंभीर ठेस पहुंचेगी। राज्य में इस पुनरीक्षण को लेकर पहले से ही तनाव है और कई जगहों पर लोग इसका विरोध कर रहे हैं।
इससे पहले, बुधवार को ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर भी यह दावा किया था कि एसआईआर के दबाव में एक आंगनवाड़ी वर्कर सह बीएलओ ने आत्महत्या कर ली है।
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