साहित्य के फलक पर अपनी अमिट छाप छोड़ने वाली विभूतियों में मैथिली संस्मरण ‘धात्री पात सन गाम’ के लिए महेंद्र और मलयालम उपन्यास ‘मायामानुष्यर’ के रचयिता एन. प्रभाकरन का नाम प्रमुखता से उभरा है। इसी कड़ी में मणिपुरी कहानी ‘कंगलमद्रीब इफुत’ के लिए हाओबम नलिनि, मराठी आत्मकथा ‘कालयानियया रेषा’ के लेखक राजू बाविस्कर और नेपाली निबंध ‘नेपाली पारम्परिक संस्कृति र सभ्यताको ढुकुटी’ के लिए प्रकाश भट्टराई को सम्मानित किया जाएगा। ओड़िआ काव्य जगत से गिरिजाकुमार बलियारसिंह को उनकी कृति ‘पदपुराण’ के लिए यह प्रतिष्ठित अकादमी पुरस्कार दिया जाएगा।
रचनात्मकता के इस सफर में पंजाबी कहानी ‘सेफ्टी किट’ के लिए जिंदर और राजस्थानी कथा ‘भरखमा’ के लिए जितेंद्र कुमार सोनी अपनी लेखनी का लोहा मनवा चुके हैं। संस्कृत की कालजयी परंपरा में महामहोपाध्याय साधु भद्रेशदास को ‘प्रस्थानचतुष्टये ब्रह्मघोषः’ (कविता) के लिए, जबकि संथाली कहानियों की दुनिया में सुमित्रा सोरेन को ‘मिड बिर्ना चेनने साओन इनाग सागई’ के लिए चुना गया है। सिंधी साहित्य में भगवान अटलानी को उनकी कहानी ‘वाघू’, तमिल साहित्यिक आलोचना ‘तमिळ सिरुकथैयिन थडंगल’ के लिए सा. तमिलसेलवन और तेलुगु काव्य ‘अनिमेष’ के लिए नंदिनी सिद्धरेड्डी को साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा जाएगा।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


