एशिया की धड़कनें तेज़: क्या मैक्सिको का फैसला एक सीधी चुनौती है?
यह सच है कि दुनिया की रफ़्तार एशियाई सप्लाई चेन के इर्द-गिर्द घूमती है। ऐसे में, जब मेक्सिको ने अपने उद्योगों की ढाल मजबूत करने और अमेरिका के साथ अपनी दोस्ती को और गहरा करने के लिए टैरिफ का दांव खेला है, तो यह सवाल लाज़मी है कि क्या यह सीधे एशिया को दी गई चुनौती है?
विशेषज्ञों की मानें तो मेक्सिको अमेरिकी दबाव में चीन से थोड़ी दूरी बनाने की कोशिश कर रहा है। इसके पीछे 2026 में होने वाली USMCA (United States-Mexico-Canada Agreement) की समीक्षा का एक राजनीतिक संदेश भी छिपा है। इस कदम से मेक्सिको की अपनी घरेलू इंडस्ट्री को पंख लग सकते हैं, लेकिन यह भी तय है कि आयातित सामान की कीमतें बढ़ने से देश के भीतर महंगाई की आग भड़क सकती है।
और जब बात एशिया की हो रही है, तो भारत भी इससे अछूता नहीं है। भारत भी उन एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में से है जिन पर टैरिफ का असर पड़ सकता है। इसका सीधा मतलब है कि भारत और मेक्सिको के बीच व्यापार के कई अहम मोर्चों, खासकर मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, ऑटो और प्लास्टिक जैसे क्षेत्रों में इस फैसले की गूंज सुनाई देगी।
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