तमिलनाडु में बाढ़ का कहर: मूसलाधार बारिश से तबाही, गांवों में घुसा पानी
तमिलनाडु का थेनी जिला इन दिनों प्रकृति के प्रकोप से जूझ रहा है। मूसलाधार बारिश ने मुल्लापेरियार नदी को उफान पर ला दिया है, जिसके चलते कई गांव जलमग्न हो गए हैं और व्यापक तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। रविवार की सुबह नदी के तटबंध टूटने से उथमपलायम, वीरापंडी, उप्पुकोट्टई और पलानीचेट्टीपट्टी के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल गया। देखते ही देखते घर, खेत और सड़कें पानी की चपेट में आ गईं।
ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पलायन, मंदिर मार्ग बंद
बाढ़ का पानी कुछ ही घंटों में रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया, जिससे कई परिवारों को अपना घर छोड़कर ऊंची जगहों पर शरण लेनी पड़ी। प्रसिद्ध वीरापंडी गौमारीअम्मन मंदिर जाने वाला मार्ग पूरी तरह से बह गया है, जिसके कारण मंदिर और आसपास की बस्तियों का संपर्क टूट गया है।
किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद, भारी नुकसान
किसानों के लिए यह बाढ़ एक विनाशकारी साबित हुई है। कटाई के लिए तैयार 200 एकड़ से अधिक धान की फसलें पानी में डूब गईं। इसके अलावा, केले, नारियल और मक्के की खड़ी फसलें भी पूरी तरह से तबाह हो गईं। वीरपंडी के एक किसान आर. रमण ने अपने जलमग्न खेतों को देखकर निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “हम अगले हफ्ते कटाई की तैयारी कर रहे थे, लेकिन सब कुछ बर्बाद हो गया।”
सांप और जंगली जीव गांवों में घुसे, दहशत का माहौल
बाढ़ के पानी के साथ-साथ सांप और अन्य जंगली जीव भी गांवों में घुस आए हैं, जिससे निवासियों में दहशत का माहौल है। उथमपलायम की निवासी मालती ने बताया, “यह बहुत भयावह है, खासकर बच्चों वाले परिवारों के लिए। हम बिना डरे बाहर भी नहीं निकल सकते।”
राहत-बचाव अभियान जारी, बचाव दल मुस्तैद
पलानीचेट्टीपलायम के पास अंजनेया नगर में कई घर पानी में डूब गए थे, जिसके बाद अग्निशमन और बचाव सेवा विभाग ने एक नाटकीय बचाव अभियान चलाया। बचाव दल ने देर रात तक जेसीबी मशीनों और नावों की मदद से फंसे हुए निवासियों को सुरक्षित निकाला। हालांकि, स्थानीय लोगों ने आपदा की गंभीरता के लिए अधिकारियों की तैयारी में कमी को जिम्मेदार ठहराया है। एक निवासी ने कहा, “अगर जल स्तर बढ़ने पर एहतियाती कदम उठाए गए होते, तो आज हमें इतना नुकसान नहीं झेलना पड़ता।”
प्रशासन राहत कार्यों में जुटा, आगे भी बाढ़ का खतरा
थेनी जिला प्रशासन के अधिकारी राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। स्कूलों और सार्वजनिक भवनों में अस्थायी आश्रय स्थल बनाए जा रहे हैं। हालांकि, क्षेत्र में भारी बारिश जारी रहने के कारण, आगे भी बाढ़ आने की आशंका बनी हुई है।
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