राष्ट्रपति मुर्मू की केरल यात्रा: आस्था, स्मृति और उत्सव का संगम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 21 अक्टूबर से केरल की चार दिवसीय महत्वपूर्ण यात्रा पर हैं, जिसका समापन 24 अक्टूबर को होगा। यह यात्रा आस्था, राष्ट्र निर्माण और शैक्षणिक उपलब्धियों के विभिन्न महत्वपूर्ण पड़ावों को स्पर्श करेगी।
सबरीमाला में आस्था का संगम:
अपनी यात्रा के दूसरे दिन, 22 अक्टूबर को, राष्ट्रपति मुर्मू प्रसिद्ध सबरीमाला अय्यप्पा मंदिर में दर्शन और आरती के लिए उपस्थित होंगी। यह आध्यात्मिक अनुभव उनके यात्रा कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो देश के धार्मिक और सांस्कृतिक ताने-बाने से जुड़ा है।
स्मृति के दीप और ऐतिहासिक शताब्दी समारोह:
23 अक्टूबर का दिन पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन के प्रति सम्मान और श्री नारायण गुरु के शताब्दी समारोह के उद्घाटन से चिह्नित होगा। राष्ट्रपति तिरुवनंतपुरम में पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन की प्रतिमा का अनावरण करेंगी, जो उनकी विरासत को सहेजने का एक प्रयास है। इसके पश्चात्, वे वर्खला स्थित शिवगिरी मठ में श्री नारायण गुरु की महासमाधि शताब्दी समारोह का उद्घाटन करेंगी, जो एक महान समाज सुधारक और दार्शनिक के योगदान को याद करने का अवसर है। इसी दिन, राष्ट्रपति सेंट थॉमस कॉलेज, पलई के प्लैटिनम जुबली (75वीं वर्षगांठ) के समापन समारोह में भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएंगी, जो शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित संस्थान की महत्वपूर्ण उपलब्धि का उत्सव है।
शैक्षणिक शिखर पर मुख्य अतिथि:
यात्रा के अंतिम दिन, 24 अक्टूबर को, राष्ट्रपति मुर्मू एर्नाकुलम स्थित सेंट टेरेसा कॉलेज के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। यह प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान के सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाला एक विशेष समारोह होगा, जिसमें राष्ट्रपति की उपस्थिति इसे और भी खास बना देगी।
राष्ट्रपति मुर्मू की यह केरल यात्रा न केवल देश के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को दर्शाती है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाली प्रमुख हस्तियों को श्रद्धांजलि भी अर्पित करती है, साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में मील के पत्थर हासिल करने वाले संस्थानों का अभिनंदन भी करती है।
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