राहुल गांधी का प्रहार: “हवा, पानी और दवा में जहर… यही है बीजेपी का नया स्मार्ट सिटी मॉडल!” इंदौर की पेयजल त्रासदी पर सरकार को घेरा और पूछा- आखिर गरीबों की मौत का जिम्मेदार कौन?
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का ‘स्मार्ट सिटी’ तमगा उस समय सवालों के घेरे में आ गया, जब भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों ने कोहराम मचा दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस त्रासदी को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वच्छ शहर में लोगों का दूषित पानी पीकर मरना प्रशासन की घोर विफलता है और यही बीजेपी की ‘डबल इंजन’ सरकार का असली स्मार्ट सिटी मॉडल है।
इंदौर में पीड़ितों और उनके परिवारों से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपना आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, “बीजेपी की डबल इंजन सरकार का नया स्मार्ट सिटी मॉडल: पानी में ज़हर, हवा में ज़हर, दवा में ज़हर, ज़मीन में ज़हर, और जवाब मांगो तो चलेगा बुलडोजर! इस मॉडल की कड़वी सच्चाई यही है कि यहां गरीबों की मौतों की कोई जिम्मेदारी नहीं लेता।” राहुल ने मांग की कि सरकार अपनी लापरवाही स्वीकार करे, दोषियों को कड़ी सजा दे और पीड़ितों को तुरंत बेहतर इलाज व उचित मुआवजा सुनिश्चित कराए।
इससे पहले, राहुल गांधी शनिवार को स्वयं भागीरथपुरा पहुंचे। उन्होंने एक निजी अस्पताल में भर्ती उन मरीजों से मुलाकात की, जो दूषित पानी के कारण उल्टी-दस्त की चपेट में आए थे। राहुल ने मरीजों और उनके परिजनों का ढांढस बंधाया। इस दौरे के दौरान उनके साथ मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी मौजूद रहे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने पीड़ित परिवारों के घर जाकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमें बड़े-बड़े वादे किए गए थे कि देश को स्मार्ट शहर मिलेंगे। लेकिन इंदौर का यह ‘नया मॉडल’ देखिए, जहां लोगों को पीने का साफ पानी तक नसीब नहीं है। उलटा, सवाल पूछने वालों को डराया जा रहा है।”
उन्होंने आगे कहा, “यह सिर्फ इंदौर की कहानी नहीं है, बल्कि देश के कई शहरों में यही हाल है। प्रदूषण मुक्त वातावरण और शुद्ध पेयजल देना सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है, जिसे निभाने में वह पूरी तरह नाकाम रही है।” राहुल ने जोर देकर कहा कि इस त्रासदी की जिम्मेदारी किसी न किसी को तो लेनी ही होगी और सरकार को अपनी जवाबदेही से भागना बंद करना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र की भारी लापरवाही ने इस स्वच्छतम शहर की छवि पर दाग लगा दिया है। उन्होंने जोर दिया कि प्रशासन को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पीड़ितों की हर संभव मदद और न्याय सुनिश्चित करना चाहिए।
राहुल गांधी के इस दौरे को लेकर प्रशासन ने भागीरथपुरा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। गौरतलब है कि इस इलाके में दूषित पानी का प्रकोप दिसंबर के अंत से शुरू हुआ था। जहां स्थानीय लोग इस बीमारी से अब तक 24 मौतों का दावा कर रहे हैं, वहीं राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में केवल 7 मौतों की रिपोर्ट दी है।
हालांकि, महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय की ‘डेथ ऑडिट’ रिपोर्ट ने सरकारी दावों पर सवाल खड़े किए हैं, जिसमें 15 मौतों का सीधा संबंध इस बीमारी से बताया गया है। दूसरी ओर, प्रशासन ने अब तक 21 मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ मौतें अन्य बीमारियों से भी हुई हैं, लेकिन मानवीय आधार पर सभी को मुआवजा दिया जा रहा है।
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