आक्रोशित चीखें, खामोश होतीं उम्मीदें: एक और दुर्घटना ने छीनीं 6 जिंदगियां
हादसे की भयावह खबर फैलते ही, आस-पड़ोस के लोगों की भीड़ राहत और बचाव के लिए दौड़ पड़ी। उनकी चीख-पुकार के बीच, पुलिस का आगमन हुआ। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां जीवन की डोर टूट चुकी 5 चेहरों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शेष, जिन्हें जीवन की एक और सांस की आस थी, उन्हें मेरठ के लिए रेफर किया गया। वहां, एक और अनमोल जीवन ने अंतिम सांस ली, जिससे कुल मृतकों का आंकड़ा 6 पर पहुंच गया।
यह दुखद घटना, जिसने 3 महिलाओं और 3 पुरुषों की जान ली, ने कई परिवारों को हमेशा के लिए तबाह कर दिया। पुलिस ने तुरंत शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मृतकों के प्रियजनों को इस अकल्पनीय क्षति की सूचना दी। दुर्घटना की वजह जानने के लिए जांच का सिलसिला शुरू हो चुका है।
यह कोई पहली बार नहीं है जब सड़कों पर मौत का तांडव हुआ है। यादों के पन्नों में, 27 सितंबर की तारीख भी काली स्याही से लिखी है। उन्नाव जिले में, लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर, एक अनियंत्रित कार ने यूपीडा के श्रमिकों को बेरहमी से कुचल दिया था, और इस भयावह हादसे में 4 जिंदगियां समा गईं थीं। इस बार, भाग्य ने एक बार फिर क्रूर खेल खेला, और 6 और निर्दोष जिंदगियां काल के गाल में समा गईं।
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