युवा कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इस पूरी विफलता का जिम्मेदार भाजपा को ठहराया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “यह कैसी विडंबना है कि जो प्रधानमंत्री दो देशों के बीच युद्ध रुकवाने का दावा करते हैं, वे देश में पेपर लीक नहीं रोक पा रहे।” उन्होंने एनडीए (NTA) की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल दागते हुए पूछा कि आखिर इस संस्था का ऑडिट कौन करता है और किन आधारों पर निजी वेंडरों को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जाती है? चिब ने पुरजोर मांग की है कि शिक्षा मंत्री तुरंत इस्तीफा दें, सरकार प्रभावित छात्रों को मुआवजा दे और नीट पेपर लीक मामले की जांच के लिए जेपीसी (JPC) का गठन किया जाए।
दूसरी ओर, विनोद जाखड़ ने इस घोटाले का केंद्र राजस्थान को बताते हुए आरोप लगाया कि पेपर लीक को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था, जिसने लाखों युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए घेराबंदी करते हुए कहा, “आखिर क्या वजह है कि पिछले 10 सालों में 89 बार पेपर लीक हुए, 4 बार नीट का पर्चा लीक हुआ और 48 बार दोबारा परीक्षाएं करानी पड़ीं?” जाखड़ के अनुसार, ये घटनाएं हमारी पूरी शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती हैं। उन्होंने कहा कि देश का छात्र अब जान चुका है कि मोदी सरकार इस मोर्चे पर विफल है, जिससे युवाओं के बीच भारी निराशा और हताशा का माहौल है।
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