सड़कों पर पुराने वाहनों का होगा ‘महंगा’ खेल: सरकार ने फिटनेस शुल्क में किया भारी इजाफा
नए नियम, नई दरें: 10 साल से पुराने वाहनों पर बढ़ेंगे फिटनेस टेस्ट के दाम
नई दिल्ली: अब पुराने, ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले और असुरक्षित वाहनों को सड़क से हटाना केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी प्राथमिकता बन गया है। इसी दिशा में, सरकार ने पूरे भारत में वाहन फिटनेस परीक्षण शुल्क में भारी संशोधन की अधिसूचना जारी की है। इस नए, आयु-आधारित ढांचे का उद्देश्य धीरे-धीरे पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना है। केंद्रीय मोटर वाहन नियम (पाँचवें संशोधन) के तहत संशोधित ये नए शुल्क अब पूरे देश में लागू हो गए हैं। 11 नवंबर को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा जारी एक अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि अब 10 वर्ष पुराने वाहनों पर पहले की 15 वर्ष की सीमा के बजाय उच्च शुल्क स्लैब लागू होंगे।
आयु के साथ बढ़ेगा फिटनेस का खर्च: तीन वर्गों में बंटे वाहन
संशोधित रूपरेखा के तहत, वाहनों को उनकी आयु के आधार पर तीन प्रमुख वर्गों में विभाजित किया गया है: 10-15 वर्ष, 15-20 वर्ष और 20 वर्ष से अधिक। इन सभी वर्गों के लिए फिटनेस परीक्षण शुल्क में उत्तरोत्तर वृद्धि की गई है। सबसे बड़ा झटका दो दशक से अधिक पुराने व्यावसायिक वाहनों को लगेगा।
- भारी मालवाहक वाहन और बसें (20 वर्ष से अधिक): अब इन्हें फिटनेस टेस्ट के लिए ₹25,000 का भुगतान करना होगा, जो कि पहले केवल ₹3,500 था। यह एक महत्वपूर्ण वृद्धि है।
- मध्यम वाणिज्यिक वाहन (20 वर्ष से अधिक): इन वाहनों पर ₹20,000 का शुल्क लगेगा।
- पुराने हल्के मोटर वाहन (एलएमवी) (20 वर्ष से अधिक): इन पर शुल्क ₹10,000 से बढ़कर ₹15,000 हो जाएगा।
दोपहिया और तिपहिया वाहनों को भी नहीं मिली राहत
सिर्फ व्यावसायिक ही नहीं, बल्कि दोपहिया और तिपहिया वाहनों के मालिकों को भी अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी। 20 वर्ष से अधिक आयु के दोपहिया वाहनों के लिए फिटनेस परीक्षण शुल्क ₹600 से बढ़कर ₹2,000 हो गया है। इसी आयु वर्ग के तिपहिया वाहनों पर अब ₹7,000 का शुल्क लगेगा।
नए वाहनों पर भी बढ़ेगा शुल्क
यह मत समझिएगा कि केवल पुराने ही महंगे हुए हैं, अपेक्षाकृत नए वाहनों पर भी अब अधिक शुल्क लगेगा। संशोधित नियम 81 के अनुसार:
- 15 वर्ष से कम आयु की मोटरसाइकिलों पर ₹400 का शुल्क लगेगा।
- एलएमवी पर ₹600 का शुल्क निर्धारित किया गया है।
- मध्यम/भारी वाणिज्यिक वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाणन का शुल्क ₹1,000 होगा।
पुराने वाहनों पर नियंत्रण की व्यापक रणनीति
यह कदम अगस्त में परिवहन मंत्रालय द्वारा पुराने वाहनों के नवीनीकरण शुल्क में संशोधन के बाद आया है। लगभग उसी समय, सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों के मालिकों के खिलाफ कोई भी जबरदस्ती कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था, जिससे कुछ हद तक राहत मिली थी। बहरहाल, यह नई और संशोधित शुल्क संरचना पुराने वाहनों को रिटायरमेंट के लिए प्रोत्साहित करने, वायु प्रदूषण को कम करने और सड़क सुरक्षा को बढ़ाने की सरकार की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
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