महंगाई का तड़का: अब घर की थाली भी हुई महंगी, जानिए क्यों बढ़ गए वेज और नॉन-वेज खाने के दाम!

क्रिसिल इंटेलिजेंस की ताजा मासिक रिपोर्ट ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ने वाली खबर दी है। अगस्त महीने में घर पर बनने वाले भोजन की लागत में मामूली लेकिन ध्यान देने वाली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, एक शाकाहारी थाली की कीमत सालाना आधार पर एक प्रतिशत बढ़कर 29.5 रुपये प्रति प्लेट हो गई है, जबकि मांसाहारी भोजन पसंद करने वालों की जेब पर अधिक भार पड़ा है; मांसाहारी थाली की लागत पांच प्रतिशत बढ़कर 57.5 रुपये तक पहुंच गई है। इस तेजी के पीछे प्याज, खाद्य तेल, चावल और रसोई गैस (एलपीजी) की बढ़ती कीमतों का हाथ है, हालांकि आलू और टमाटर के घटते दामों ने महंगाई के इस ग्राफ को बहुत ज्यादा ऊपर जाने से रोक लिया।
प्याज के ‘तीखे’ तेवर: 43 प्रतिशत बढ़ी कीमत
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि अगस्त में प्याज ने आम जनता को खूब रुलाया। प्याज की कीमत सालाना आधार पर 43 प्रतिशत की छलांग लगाकर 40 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, जो पिछले साल इसी समय 28 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इस बेतहाशा बढ़ोतरी का मुख्य कारण महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल के दौरान हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि को माना जा रहा है, जिससे प्याज की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई।
इसी अवधि के दौरान खाद्य तेल की कीमतों में 11 प्रतिशत और रसोई गैस (LPG) में 10 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। राहत की बात यह रही कि आलू की कीमतों में 12 प्रतिशत और टमाटर में 28 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे शाकाहारी थाली की लागत में होने वाली बड़ी बढ़ोतरी पर लगाम लग गई। नतीजतन, शाकाहारी थाली की कीमत में सालाना और मासिक आधार पर केवल एक-एक प्रतिशत का ही अंतर आया।
नॉन-वेज प्रेमियों पर चिकन की मार: 10% की वार्षिक वृद्धि
अगर आप मांसाहारी भोजन के शौकीन हैं, तो आपके लिए खबर मिली-जुली है। मुर्गे के मांस (चिकन) की कीमतों में 10 प्रतिशत के उछाल के कारण मांसाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर पांच प्रतिशत बढ़कर 57.5 रुपये हो गई। हालांकि, अगर मासिक आधार पर देखें तो जुलाई (58.3 रुपये) के मुकाबले अगस्त में यह एक प्रतिशत सस्ती रही है।
क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषन शर्मा ने भविष्य की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगले दो-तीन महीनों तक प्याज की कीमतें कम होने के आसार नहीं हैं। रबी फसल की कम आवक और खरीफ फसल के आने में हो रही देरी इसका प्रमुख कारण है। अगस्त में प्याज के दाम मासिक आधार पर 17 प्रतिशत बढ़े, लेकिन टमाटर के सात प्रतिशत सस्ते होने से इसका असर संतुलित हो गया। वहीं, हिंदुओं के पवित्र श्रावण मास के चलते मांग कम होने से चिकन की कीमतों में चार प्रतिशत की मासिक गिरावट देखी गई, जिससे अगस्त में मांसाहारी थाली जुलाई के मुकाबले थोड़ी किफायती रही।
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