तेहरान | 11 जनवरी 2026
ईरान इस समय पिछले कई वर्षों के सबसे गंभीर जन-आंदोलन का सामना कर रहा है। देश में बिगड़ती आर्थिक स्थिति, बढ़ती महंगाई और जरूरी सामानों की कीमतों में तेज़ उछाल के खिलाफ शुरू हुआ विरोध अब सीधे इस्लामिक रिपब्लिक को सत्ता से हटाने की मांग में बदल चुका है।
खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी के बाद तेहरान के बाज़ारों से शुरू हुआ यह आंदोलन अब देश के सभी 31 प्रांतों में फैल चुका है। भारी सुरक्षा बलों की तैनाती, इंटरनेट बंदी और सख्त कार्रवाई के बावजूद हजारों लोग सड़कों पर उतर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कई इलाकों में जलते वाहन, नारे लगाते प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बलों से टकराव की तस्वीरें दिख रही हैं।
इसी बीच ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आज़ाद ने चेतावनी दी है कि विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों को “खुदा का दुश्मन” माना जाएगा। ईरान के कानून में यह आरोप मृत्युदंड से जुड़ा हुआ है। यह जानकारी समाचार एजेंसी एपी ने दी है।
वहीं, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने कहा है कि देश की सुरक्षा एक “रेड लाइन” है और इससे किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
ईरान की सेना ने भी बयान जारी कर कहा है कि वह राष्ट्रीय हितों, रणनीतिक ढांचे और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करेगी और नागरिकों से “दुश्मन की साज़िशों” से सतर्क रहने की अपील की है।
मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक अब तक कम से कम 65 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया तेज़ हो गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों को मारा गया तो अमेरिका ईरान पर “बहुत कड़ी कार्रवाई” करेगा। वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों पर विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है।
ईरान में अब तक क्या स्थिति है
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लगातार 12वें दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी
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पूरे देश में इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल सेवाएं बंद
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65 से ज्यादा मौतें, 2,300 से अधिक गिरफ्तारियाँ
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तेहरान, मशहद समेत बड़े शहरों में भारी भीड़
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खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को “विदेशी एजेंट” बताया
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न्यायपालिका ने “अधिकतम सज़ा” देने की बात कही
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अमेरिका और यूरोप ने हिंसा की निंदा की
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कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों ने ईरान की उड़ानें रद्द कीं
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सरकारी मीडिया ने प्रदर्शनकारियों को “आतंकी” बताया
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पूर्व क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी की अपील से विरोध तेज़
लाइव अपडेट्स
🕚 10 जनवरी 2026 | रात 11:45
तेहरान के हेरावी इलाके में प्रदर्शनकारियों ने धार्मिक शासन के खिलाफ नारे लगाए। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आए हैं।
🕚 रात 11:19
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक विदेशी नागरिक को इज़राइल के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया।
🕚 रात 11:14
लंदन स्थित ईरानी दूतावास पर एक प्रदर्शनकारी ने मौजूदा झंडे की जगह 1979 से पहले वाला शाह काल का झंडा लगा दिया।
🕥 रात 10:43
अटॉर्नी जनरल ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को “खुदा का दुश्मन” माना जाएगा, जिस पर मौत की सज़ा हो सकती है।
🕥 रात 10:36
पूर्व क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी की अपील के बाद तेहरान के पूनाक इलाके में फिर प्रदर्शन शुरू हुए।
🕘 रात 9:53
यूरोपीय संघ ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया और इंटरनेट बंदी हटाने की मांग की।
🕘 रात 9:01
ईरान के उपराष्ट्रपति ने विरोध प्रदर्शनों के लिए “बाहरी दुश्मनों” को जिम्मेदार ठहराया।
🕗 शाम 8:06
देशभर में इंटरनेट सेवाएं अब भी बंद हैं।
🕢 शाम 7:26
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने ईरान के मौजूदा झंडे की जगह पुराना ‘शेर और सूरज’ वाला झंडा दिखाना शुरू किया।
🕡 शाम 6:34
अमेरिका ने आरोप लगाया कि ईरान विदेशी लड़ाकों की मदद से प्रदर्शन दबा रहा है।
🕕 शाम 6:08
ब्लूमबर्ग के मुताबिक यह वर्षों का सबसे बड़ा जन आंदोलन है, दर्जनों मौतों की आशंका।
🕔 शाम 5:51
कई बड़े शहरों में नए विरोध प्रदर्शन शुरू हुए।
🕔 शाम 5:04
ईरानी फिल्म निर्माताओं ने सरकार पर “खुले दमन” का आरोप लगाया।
🕓 शाम 4:43
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया।
🕓 शाम 4:33
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, “अमेरिका ईरान के बहादुर लोगों के साथ खड़ा है।”
🔴 ईरान में हालात और बिगड़े, आज की ताज़ा स्थिति
ईरान में विरोध प्रदर्शन अब केवल आर्थिक असंतोष तक सीमित नहीं रह गए हैं। आज सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें और तेज़ हो गई हैं। तेहरान, इस्फहान, शिराज़ और तबरीज जैसे बड़े शहरों में देर रात तक नारेबाज़ी और सड़क जाम की खबरें हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने कई इलाकों में आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया, जबकि प्रदर्शनकारियों ने भी बैरिकेड्स लगाकर सड़कों को बंद कर दिया। कुछ जगहों पर सरकारी इमारतों और बैंकों को नुकसान पहुंचने की खबरें हैं।
🛑 सरकार की सख्ती और बढ़ी
ईरानी सरकार ने आज संकेत दिए हैं कि वह विरोध प्रदर्शनों को किसी भी कीमत पर फैलने नहीं देगी। गृह मंत्रालय ने प्रांतों के गवर्नरों को निर्देश दिया है कि “कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों” के खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाए।
सरकारी टीवी पर प्रसारित बयानों में कहा गया कि
“देश की एकता और इस्लामिक व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा।”
इसी के साथ कई विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में अस्थायी छुट्टियां घोषित की गई हैं, ताकि छात्रों की भागीदारी को रोका जा सके।
🌐 इंटरनेट बंदी से जनता परेशान
आज भी ईरान के अधिकांश हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं ठप रहीं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, मैसेजिंग ऐप्स और अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग लगभग पूरी तरह बंद हैं।
डिजिटल अधिकार संगठनों का कहना है कि यह बंदी जानबूझकर की गई है ताकि
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प्रदर्शन की तस्वीरें बाहर न जा सकें
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प्रदर्शनकारियों के बीच समन्वय टूटे
हालांकि इसके बावजूद लोग पारंपरिक तरीकों और सीमित नेटवर्क के जरिए एक-दूसरे से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
🌍 अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा
आज कई पश्चिमी देशों ने ईरान पर दबाव और बढ़ा दिया है।
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यूरोपीय संघ के कुछ सदस्य देशों ने नई कूटनीतिक बैठकों की बात कही है
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने स्थिति पर “गंभीर चिंता” जताई है
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कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने ईरान से मृत्युदंड की चेतावनी वापस लेने की मांग की है
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हिंसा और बढ़ती है, तो ईरान को नए प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
👑 रेज़ा पहलवी की अपील का असर जारी
ईरान के पूर्व शाह के बेटे रेज़ा पहलवी की अपील का असर आज भी देखने को मिला। सोशल मीडिया और विदेशों में बसे ईरानियों के बीच उनके संदेशों को व्यापक समर्थन मिल रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह आंदोलन अब
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केवल आर्थिक विरोध नहीं
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बल्कि राजनीतिक बदलाव की मांग में बदल चुका है
और यही बात ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान के लिए सबसे बड़ी चिंता बनती जा रही है।
⚠️ आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, आने वाले कुछ दिन ईरान के लिए बेहद अहम होंगे।
अगर सरकार और ज्यादा सख्ती अपनाती है, तो हालात और विस्फोटक हो सकते हैं।
वहीं, किसी भी तरह की नरमी को सरकार अपनी कमजोरी मानने को तैयार नहीं दिख रही।
ईरान एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां
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एक तरफ जनता का गुस्सा है
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और दूसरी तरफ सत्ता की सख्त पकड़
दुनिया की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि यह संकट किस दिशा में जाता है।
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