
रांची से अभिषेक आनंद और राजलक्ष्मी की रिपोर्ट
JPSC Student Protest: CBI जांच पर अड़े छात्र, CID का भरोसा दे रही सरकार; JPSC आंदोलन में 3 घंटे की बैठक के बाद भी ‘पेंच’ फंसा
झारखंड के छात्र आंदोलन ने अब एक निर्णायक मोड़ ले लिया है। छात्र प्रतिनिधिमंडल और राज्य सरकार के बीच रांची में हुई हाई-प्रोफाइल बैठक में जांच एजेंसी के चयन को लेकर गहरा गतिरोध पैदा हो गया है। जहां एक ओर छात्र TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं की धांधली की परतें खोलने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं, वहीं सरकार मामले की कमान राज्य की CID को सौंपने पर अड़ी हुई है। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा; न्याय के लिए निष्पक्षता और केंद्रीय एजेंसी का दखल अनिवार्य है।
महामंथन: 3 घंटे की बातचीत और वो एक ‘गतिरोध’
सरकार और छात्रों के बीच यह बैठक तीन घंटे से भी अधिक समय तक चली। बंद कमरे से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, छात्रों की कई मांगों पर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है और सहमति की स्थिति भी बनी है, लेकिन ‘जांच एजेंसी’ का मुद्दा एक ऐसी दीवार बन गया है जिसे पार करना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है। इसी एक बिंदु ने बातचीत की पूरी रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।
लखनऊ कनेक्शन और TDPL: क्यों CBI ही चाहिए?
छात्रों ने TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर उंगलियां उठाई हैं। उनका तर्क है कि TDPL का मुख्यालय लखनऊ में है और प्रिंटिंग का काम किसी अन्य राज्य में होता है। ऐसे में परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता पर उठे सवालों की गहराई से जांच के लिए राज्य की सीमा से बाहर जाकर काम करने वाली केंद्रीय एजेंसी (CBI) की जरूरत है। छात्रों का मानना है कि इस मामले के तार कई राज्यों और संस्थानों से जुड़े हो सकते हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच केवल CBI ही कर सकती है।
सरकार का CID कार्ड: भरोसे की चुनौती
बैठक की मेज पर सरकार लगातार CID जांच का प्रस्ताव रख रही है। सरकारी प्रतिनिधियों का कहना है कि राज्य की जांच एजेंसी इस मामले की तह तक जाने में सक्षम है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, छात्र इस भरोसे को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। उनकी मांग प्रक्रिया के साथ-साथ उसकी विश्वसनीयता को लेकर है, और इसी खींचतान के कारण बैठक का समय बढ़ता जा रहा है।
JPSC-JSSC रिफॉर्म्स: छात्रों की बड़ी जीत
भले ही जांच एजेंसी पर पेंच फंसा हो, लेकिन परीक्षा प्रणाली में सुधार (Reforms) को लेकर छात्रों को बड़ी कामयाबी मिली है। सरकार ने JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली को दुरुस्त करने की छात्रों की मांग मान ली है। इसके तहत एक उच्च-स्तरीय कमेटी गठित की जाएगी, जिसमें IIT, XISS और ISM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ-साथ कुछ प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों को भी शामिल किया जाएगा। यह कमेटी परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए ब्लूप्रिंट तैयार करेगी।
एक महीने का अल्टीमेटम: छात्र भी देंगे राय
प्रस्तावित सुधार कमेटी को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। इस प्रक्रिया की सबसे खास बात यह है कि कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार करने से पहले सीधे छात्रों से संवाद करेगी और उनके सुझावों को शामिल करेगी। लंबे समय से JPSC-JSSC की परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग कर रहे छात्रों के लिए इसे सरकार की ओर से एक बड़ा सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
निष्कर्ष का इंतजार: क्या निकलेगा बीच का रास्ता?
इतनी लंबी बातचीत के बावजूद अभी तक कोई अंतिम समाधान नहीं निकल पाया है। बैठक के भीतर से मिल रही जानकारियों के अनुसार, सुधारों पर तो सहमति है, लेकिन ‘CBI बनाम CID’ का मुद्दा अभी भी सुलझा नहीं है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार छात्रों की जिद के आगे झुकते हुए CBI जांच की सिफारिश करेगी या छात्र CID जांच के आश्वासन पर मान जाएंगे? फिलहाल, रांची की इस बैठक के नतीजे ही झारखंड के छात्र आंदोलन की अगली दिशा तय करेंगे।
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