
सिस्टम की सेंधमारी: कहीं OMR शीट में ‘खेल’, तो कहीं रिजल्ट से पहले ही ‘खास’ अभ्यर्थियों की लिस्ट तैयार! 25% परीक्षाओं पर उठे संगीन सवाल, क्या खतरे में है भर्ती प्रक्रिया की साख?
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित 9 बड़ी परीक्षाओं में कथित धांधली के ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिन्होंने प्रदेश के युवाओं की नींद उड़ा दी है। CID द्वारा रांची हाई कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं—कहीं OMR शीट से छेड़छाड़ हुई, तो कहीं परीक्षा खत्म होने के कई दिनों बाद उत्तर पुस्तिकाएं लिखवाई गईं। यह मामला महज कागजी हेरफेर का नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के संघर्ष का है जो अपनी उम्र की आखिरी सीमा और घर की जमा-पूंजी दांव पर लगाकर इन परीक्षाओं में बैठते हैं।
आखिर इन परीक्षाओं की पवित्रता कैसे भंग हुई? परीक्षा लेने वाली एजेंसियों और तत्कालीन पदाधिकारियों की साठगांठ की गहराई क्या है? और सबसे बड़ा सवाल—अगर ये आरोप सच साबित होते हैं, तो ईमानदारी से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को इंसाफ कैसे मिलेगा?
आइए देखते हैं, जांच के घेरे में कौन-कौन सी परीक्षाएं हैं:
1. 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2025: ओएमआर शीट पर चली ‘जादुई’ कलम?
इस परीक्षा में 103 पदों के लिए 2,17,104 अभ्यर्थियों ने दावेदारी पेश की थी। प्रारंभिक परीक्षा के बाद 2,204 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए सफल हुए।
CID की चार्जशीट ने मूल्यांकन प्रक्रिया की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि ओएमआर शीट में उत्तरों को बाद में बदला गया। एक सनसनीखेज दावा यह भी है कि सिर्फ 48 सवालों के जवाब देने वाला अभ्यर्थी भी सफल घोषित कर दिया गया। अब सवाल यह है कि स्ट्रॉन्ग रूम में रखी इन उत्तर पुस्तिकाओं तक किसकी पहुंच थी?
2. 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा: अध्यक्ष के आवास से ‘सफलता की सूची’?
कुल 342 पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा में 3.20 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए और 25 जुलाई 2025 को अंतिम परिणाम आया।
जांच में एक बेहद गंभीर बात सामने आई है। तत्कालीन आयोग अध्यक्ष एल. खियांग्ते के आवास से 15 अभ्यर्थियों के नाम और रोल नंबर वाली एक सूची बरामद हुई, जिनमें से 10 अभ्यर्थी अंतिम रूप से सफल रहे। मोबाइल लोकेशन और इंटरव्यू से पहले की गतिविधियों का विश्लेषण इशारा कर रहा है कि चयन प्रक्रिया को शायद पहले ही प्रभावित कर दिया गया था।
3. वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) परीक्षा: 10 दिन बाद लिखी गई कॉपियां?
170 पदों के लिए हुई इस परीक्षा में करीब 14,000 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। मुख्य परीक्षा में 743 अभ्यर्थियों को सफलता मिली थी।
CID की रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा एजेंसी TDPL की भूमिका संदिग्ध है। आरोप है कि परीक्षा खत्म होने के करीब 10 दिन बाद एक गुप्त ठिकाने पर बैठकर उत्तर पुस्तिकाएं लिखवाई गईं। यदि यह सच है, तो यह पूरी सुरक्षा व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।
4. सहायक वन संरक्षक (ACF) परीक्षा: हुबहू मॉडल उत्तर जैसी कॉपियां!
78 पदों के लिए हुई इस परीक्षा में प्रारंभिक स्तर पर 1,110 और मुख्य परीक्षा में 368 अभ्यर्थी सफल हुए थे।
जांच में पाया गया कि एक खास अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका और ‘मॉडल आंसर’ में गजब की समानता थी। फॉरेंसिक जांच अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि आखिर एक अभ्यर्थी के पास हुबहू वही शब्द कैसे आए जो आयोग के आधिकारिक मॉडल उत्तर में थे?
5. बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) परीक्षा: मूल्यांकन में गड़बड़ी?
64 पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा की प्रक्रिया 10 जून 2024 से शुरू होकर 10 जनवरी 2026 को अंतिम परिणाम के साथ समाप्त हुई थी।
CID की चार्जशीट के अनुसार, परीक्षा एजेंसी और कुछ खास अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रखा गया। जांच अब इस बिंदु पर केंद्रित है कि क्या चयन प्रक्रिया के दौरान तय मानकों का जानबूझकर उल्लंघन किया गया?
6. झारखंड पात्रता परीक्षा (JET)-2024: दागी एजेंसी को जिम्मेदारी?
असिस्टेंट प्रोफेसर और PhD प्रवेश के लिए आयोजित इस परीक्षा (विज्ञापन 08/2025) का आयोजन 26 अप्रैल 2026 को हुआ था।
CID रिपोर्ट ने इस परीक्षा के संचालन के लिए ‘बिस्वास’ एजेंसी के चयन पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि इस एजेंसी से जुड़े व्यक्ति का नाम पहले भी पेपर लीक जैसे मामलों में आ चुका था। सवाल उठता है कि ऐसी एजेंसी को इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा की जिम्मेदारी देने से पहले क्या उसकी साख की जांच नहीं की गई?
7. सहायक लोक अभियोजक (APO) नियमित परीक्षा 2025: फर्जी दस्तावेजों का सहारा?
विज्ञापन संख्या 06/2025 के तहत इस भर्ती में अभ्यर्थियों की पात्रता और उनके द्वारा जमा किए गए प्रमाणपत्रों की वैधता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
CID के मुताबिक, कंप्यूटर प्रमाणपत्रों और अन्य पात्रता दस्तावेजों के सत्यापन में बड़ी अनियमितता बरती गई। क्या जानबूझकर अपात्र लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए वेरिफिकेशन में ढील दी गई?
8. सहायक लोक अभियोजक (APO) बैकलॉग परीक्षा 2025: बाहरी राज्यों के संदिग्ध प्रमाणपत्र
बैकलॉग भर्ती (विज्ञापन 05/2025) में भी पात्रता के मानदंडों को लेकर गंभीर शिकायतें मिली हैं।
जांच में सामने आया है कि दूसरे राज्यों से जारी संदिग्ध कंप्यूटर प्रमाणपत्रों के आधार पर अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया। सवाल यह है कि सत्यापन के दौरान इन प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच क्यों नहीं की गई और इसमें शामिल अधिकारियों की जवाबदेही क्या है?
9. खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी (FSO) परीक्षा 2023: मेरिट लिस्ट में सेंधमारी?
56 पदों के लिए हुई इस भर्ती प्रक्रिया का साक्षात्कार फरवरी 2026 में संपन्न हुआ था।
CID चार्जशीट में मुख्य आरोपी अभय कुमार तिवारी और परिणाम तैयार करने वाली टीम की भूमिका को संदिग्ध माना गया है। आरोप है कि रिजल्ट तैयार करने के चरण में खेल हुआ। अब देखना यह है कि जांच में इन आरोपों के पीछे के ठोस साक्ष्य और चेहरों का खुलासा कब होता है।
The post JPSC की 36 में से 9 परीक्षाओं में धांधली कन्फर्म, रेवड़ी की तरह बांटी गई नौकरियों का जिम्मेदार कौन? appeared first on Aware Media.
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
