पटना में महासंग्राम: BPSC अभ्यर्थियों के साथ उतरे किसान, ‘जान दे देंगे पर जमीन नहीं’ के नारों से गूंजा सैटेलाइट टाउनशिप का विरोध!

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पटना में महासंग्राम: BPSC अभ्यर्थियों के साथ उतरे किसान, 'जान दे देंगे पर जमीन नहीं' के नारों से गूंजा सैटेलाइट टाउनशिप का विरोध!
'जान दे देंगे, जमीन नहीं देंगे', पटना के BPSC प्रोटेस्ट में किसान भी आए, पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप का किया विरोध

पटना से आनंद सिंह कौशिक की विशेष रिपोर्ट

‘मर जाएंगे, पर मिट्टी नहीं देंगे’: पटना में सैटेलाइट टाउनशिप के खिलाफ किसानों का हल्ला बोल

Patliputra Satellite Township: राजधानी पटना की सड़कें आज सिर्फ छात्रों के नारों से ही नहीं, बल्कि किसानों के आक्रोश से भी गूंज उठीं. मौका था छात्र-युवाओं के प्रदर्शन का, लेकिन इसमें एक बड़ी ताकत के रूप में पुनपुन और बिहटा के सैकड़ों किसान भी शामिल हुए. ये वही किसान हैं जिनकी पुश्तैनी जमीनों पर सरकार ‘पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप’ का सपना बुन रही है, पर किसानों ने दो टूक कह दिया है—हमारी जमीन, हमारा हक है.

पटना में प्रदर्शन की लाइव कवरेज के लिए यहां क्लिक करें.

गांधी मैदान से डाकबंगला तक: जब खेतों से निकलकर सड़कों पर आए ‘अन्नदाता’

मंगलवार की सुबह गांधी मैदान का नजारा बदला-बदला था. छात्रों के जोश के साथ बुजुर्ग किसानों और महिलाओं का जज्बा भी कदमताल कर रहा था. जैसे ही यह हुजूम डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ा, माहौल तनावपूर्ण हो गया. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज और वाटर कैनन का सहारा लिया. अफरातफरी के बीच शाम होते-होते पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों को हिरासत में लिया और बसों में भरकर वहां से हटा दिया.

“ईंटों के महल का हम क्या करेंगे?” – किसानों का दर्द और गुस्सा

डाकबंगला चौराहे पर डटे किसानों की आंखों में गुस्सा और भविष्य को लेकर चिंता साफ दिखी. अवेयर मीडिया न्यूज़ से बात करते हुए किसानों ने स्पष्ट लहजे में ऐलान किया—“जेल मंजूर है, जान भी दे देंगे, लेकिन जमीन किसी कीमत पर नहीं देंगे.” उनका आरोप है कि सरकार विकास के नाम पर किसानों को दाने-दाने को मोहताज करना चाहती है.

डुमरी से आए एक किसान ने अपनी उपजाऊ जमीन का जिक्र करते हुए कहा, “बिहटा-सरमेरा हाईवे के पास की हमारी जमीन सोना उगलती है. हम साल में चार फसलें काटते हैं. सरकार वहां ईंटों का महल खड़ा करना चाहती है, पर हम उन महलों का क्या करेंगे जब पेट भरने के लिए खेत ही नहीं रहेंगे?” वहीं पुनपुन के उदय सिंह ने व्यथा सुनाई, “मेरी पांच एकड़ जमीन छीनी जा रही है. चंद रुपयों के मुआवजे का हम क्या करेंगे?”

मंत्री और अधिकारियों के सामने भी नहीं झुके किसान

विरोध की यह आग आज अचानक नहीं भड़की है. बीते 22 अगस्त को पुनपुन और नौबतपुर में प्रस्तावित टाउनशिप को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई थी. नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा, प्रधान सचिव विनय कुमार और पटना डीएम कुंदन कुमार की मौजूदगी में जब ‘लैंड पूलिंग’ का प्रस्ताव रखा गया, तो किसान भड़क उठे. अधिकारियों और जमीन मालिकों के बीच तीखी बहस हुई. किसानों ने सरकार विरोधी नारेबाजी की और बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकल गए.

क्या है पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप?

बिहार सरकार ‘डेवलपमेंट प्लान 2047’ के तहत पटना के पुनपुन और नौबतपुर प्रखंडों में एक आधुनिक ‘ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप’ बसाने की योजना पर काम कर रही है. सरकार इसे भविष्य के पटना के तौर पर देख रही है, लेकिन जमीन अधिग्रहण अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना के आड़े आ गया है. अब देखना यह होगा कि विकास का यह ‘ब्लूप्रिंट’ किसानों के विरोध के आगे टिक पाता है या बातचीत से कोई नया रास्ता निकलता है.

यह भी पढ़ें : पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप में स्कूल, हॉस्पिटल, थाने समेत होंगी ये खास सुविधाएं, सरकार ने तैयार किया ब्लूप्रिंट

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