राहुल गांधी के मनुस्मृति बयान पर BJP हमलावर, अमित मालवीय बोले- हिंदू धर्म को किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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राहुल गांधी के मनुस्मृति बयान पर BJP हमलावर, अमित मालवीय बोले- हिंदू धर्म को किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं

पुणे में मनुस्मृति का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर प्राचीन ग्रंथ की एक व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनके बयान के बाद भाजपा ने इसे राजनीतिक विमर्श में हिंदू धर्मग्रंथों की गलत व्याख्या बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।

पुणे में राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए महिलाओं की सामाजिक स्थिति से जुड़े एक श्लोक का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इसमें महिला के जीवन के अलग-अलग चरणों में पिता, पति और पुत्र के अधीन रहने की बात कही गई है।

राहुल ने इसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक सोच बताते हुए कहा कि ऐसे विचार स्वीकार नहीं किए जाने चाहिए। उनके बयान ने एक बार फिर धर्मग्रंथों, महिलाओं के अधिकार और सामाजिक समानता को लेकर राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

अमित मालवीय ने कांग्रेस पर साधा निशाना

भाजपा नेता अमित मालवीय ने राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस पर हिंदू विरोधी नैरेटिव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि धर्मग्रंथों को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय उन्हें पूरी तरह और ईमानदारी से पढ़ना चाहिए।

मालवीय के मुताबिक, राहुल गांधी को किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मनुस्मृति का व्यापक अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू धर्म को राहुल गांधी से किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है।

‘धर्मग्रंथों को राजनीतिक चश्मे से न देखें’

अमित मालवीय ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कांग्रेस की आधिकारिक पोस्ट का भी जिक्र किया। उनका आरोप था कि पार्टी हिंदू धर्मग्रंथों को अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार प्रस्तुत कर रही है।

इस प्रतिक्रिया से साफ है कि भाजपा इस मुद्दे को केवल एक बयान तक सीमित नहीं देख रही, बल्कि इसे कांग्रेस की वैचारिक राजनीति से जोड़कर जवाब दे रही है।

निशिकांत दुबे ने भी कसा तंज

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने प्रियंका गांधी का जिक्र करते हुए परिवार और कांग्रेस के नेतृत्व से जुड़े पुराने राजनीतिक प्रसंगों को सामने रखा।

दुबे की प्रतिक्रिया ने बहस को मनुस्मृति से आगे बढ़ाकर कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास और गांधी परिवार की भूमिका तक पहुंचा दिया।

महिलाओं के अधिकार पर फिर बहस

मनुस्मृति विवाद का एक बड़ा पहलू महिलाओं की स्वतंत्रता और सामाजिक अधिकारों से जुड़ा है। राहुल गांधी के बयान ने इसी सवाल को राजनीतिक मंच पर ला दिया है कि प्राचीन ग्रंथों की व्यवस्थाओं को आज के संवैधानिक मूल्यों के संदर्भ में कैसे देखा जाए।

भारत का संविधान समानता और मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है। इसलिए ऐसे मुद्दों पर होने वाली बहस इतिहास, धर्म और आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच संतुलन की मांग करती है।

बयान से आगे, बहस की दिशा क्या होगी?

राहुल गांधी के बयान और भाजपा की प्रतिक्रियाओं ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। एक तरफ कांग्रेस सामाजिक समानता और महिलाओं के अधिकार का मुद्दा उठा रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा इसे हिंदू धर्मग्रंथों की राजनीतिक व्याख्या का मामला बता रही है।

मनुस्मृति पर छिड़ी यह बहस केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। असली सवाल यह है कि इतिहास और परंपरा को समझते हुए आज के भारत में समानता, सम्मान और स्वतंत्रता जैसे संवैधानिक मूल्यों को कैसे मजबूत किया जाए।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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