मध्य पूर्व में रूसी सैटेलाइट का खौफनाक खेल, क्या पुतिन की मदद से सऊदी पर हमला कर रहे हैं हौथी विद्रोही?

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मध्य पूर्व में रूसी सैटेलाइट का खौफनाक खेल, क्या पुतिन की मदद से सऊदी पर हमला कर रहे हैं हौथी विद्रोही? बड़ा दावा- ईरान हौथी सऊदी मिसाइल हमले में मदद कर रहा रूसी सैटेलाइट, वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति पर असर!
हूती विद्रोहियों को सऊदी पर हमला करने में मदद पहुंचा रहा रूस

रूस हौथी हमला: स्विट्जरलैंड की सुरक्षा एजेंसी ‘ऑरोरा जियोसिग्नल इंटेलिजेंस’ ने दावा किया है कि सऊदी अरब पर हौथी विद्रोहियों के हमले में रूसी उपग्रह मदद कर रहे हैं। एजेंसी का दावा है कि उसने हमलों से पहले और बाद में सैटेलाइट से निगरानी की है.

सऊदी पर हमले के लिए रूस हौथी विद्रोहियों की मदद कर रहा है

रियाद: स्विट्जरलैंड की एक सुरक्षा एजेंसी ने दावा किया है कि रूस ने हौथी विद्रोहियों को सऊदी अरब पर हमला करने के लिए सैटेलाइट मदद मुहैया कराई है. स्विस सुरक्षा एजेंसी ‘ऑरोरा जियोसिग्नल इंटेलिजेंस’ ने डेटा और सबूतों का हवाला देते हुए कहा है कि उसने 1 जुलाई से 19 अक्टूबर के बीच सऊदी अरब में हौथी विद्रोहियों द्वारा किए गए हमलों का विश्लेषण किया है। इसने सऊदी अरब पर 40 मिसाइल और ड्रोन हमलों का विश्लेषण किया है जिसमें रूसी सरकार और रूसी सैन्य उपग्रहों द्वारा हमलों से पहले और बाद में लक्ष्यों की निगरानी करने का एक पैटर्न दिखाया गया है।

स्विस फर्म की रिपोर्ट में क्या हुआ खुलासा?

  • ‘ऑरोरा जियोसिग्नल इंटेलिजेंस’ के प्रमुख नवाफ ओबैद ने अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट में कहा कि उनकी एजेंसी ने रूस की सैन्य निगरानी संरचना का खाका तैयार किया है।
  • समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने सऊदी में महत्वपूर्ण तेल पाइपलाइनों और पंपिंग स्टेशनों पर कई हमले हुए थे और डेटा से पता चलता है कि इन हमलों से पहले और बाद में कई रूसी उपग्रह पाइपलाइनों और एयरबेस पर रखे गए थे।
  • नवाफ़ ओबैद ने दावा किया है कि ‘सबसे महत्वपूर्ण बात यह नहीं थी कि रूसी उपग्रह मौजूद थे, बल्कि यह थी कि उनकी विभिन्न खुफिया क्षमताओं का क्रम में और एक साथ उपयोग कैसे किया गया था।’
  • स्विस एजेंसी का एक और बड़ा दावा यह है कि रूस की सैन्य भू-स्थानिक और सिग्नल इंटेलिजेंस ईरान की खुफिया जानकारी को सटीक जानकारी दे रही है, जिसके आधार पर ईरान हौथी विद्रोहियों का मार्गदर्शन कर रहा है।

सना, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। सऊदी अरब ने यमन की राजधानी सना में हवाई हमले किए. वहीं, हौथी समूह ने दावा किया कि उसने सऊदी अरब और दक्षिणी यमन में कई ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।

40 हमलों का पैटर्न, रूसी सैटेलाइट्स की लोकेशन कैसे मिली?

  • स्विस एजेंसी ने रूस की अंतरिक्ष आधारित जासूसी प्रणाली का एक डिजिटल मॉडल तैयार किया है। इसके बाद, रूसी सरकार और सैन्य उपग्रहों की पहचान की गई जो भू-स्थानिक खुफिया (GEOINT) और सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) इकट्ठा करने में सक्षम हैं।
  • शोधकर्ताओं ने इस दौरान सभी रूसी उपग्रहों की गतिविधियों पर नज़र रखी। उनके कक्षीय पथों का गणितीय विश्लेषण किया। इससे पता चला कि कौन से उपग्रह किस समय कहां हैं, उनका सटीक कोण क्या है और वे किस देश और क्षेत्र के ऊपर से गुजर रहे हैं।
  • ‘ऑरोरा जियोसिग्नल इंटेलिजेंस’ ने सऊदी अरब, जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और यमन में 1 जुलाई से 19 अक्टूबर के बीच किए गए 40 हमलों का विश्लेषण किया। इस दौरान उन्होंने रूसी उपग्रहों को हमले से पहले और बाद की निगरानी करते देखा.

सऊदी अरब के एक अधिकारी, हौथी विद्रोहियों के एक वरिष्ठ नेता और एक निजी खुफिया विश्लेषक ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि हौथी विद्रोहियों को रूसी उपग्रहों और चीन से मदद मिल रही है। इससे वे सटीक हमला करने में सफल होते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इन हमलों के समन्वय और सऊदी के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला करने में रूसी मदद मिल रही है और इसके कारण ऊर्जा की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। सना (यमन), 23 जुलाई (आईएएनएस)। यमन के हौथी समूह ने गुरुवार को कहा कि उसने लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाते हुए एक सैन्य अभियान चलाया था। हौथिस ने दावा किया कि जहाजों ने समूह के हाल ही में घोषित समुद्री प्रतिबंधों का उल्लंघन किया है।

मध्य पूर्व युद्ध में रूस की ‘एंट्री’ के क्या होंगे नतीजे?

सऊदी विदेश मंत्रालय में सार्वजनिक कूटनीति के उप मंत्री राएद क्रिमली ने स्वीकार किया है कि हौथी हमले के पीछे रूस की मदद है। उन्होंने पिछले हफ्ते कहा था कि ईरान और हौथी विद्रोहियों को रूस और चीन के कुछ तत्वों से खुफिया मदद मिलती है. 10 सितंबर को सऊदी अरब के तीन पंपिंग स्टेशनों पर कई ड्रोन हमले किए गए थे. ड्रोन के ये झुंड इराक से आए थे और इस हमले से इतना नुकसान हुआ कि तेल सप्लाई तुरंत रोकनी पड़ी.

अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट में, किंग्स कॉलेज के ‘युद्ध अध्ययन विभाग’ के एक साथी ओबैद ने कहा कि यह पाइपलाइन पूर्वी सऊदी अरब से शुरू होती है, नज्द पठार को पार करती है, 1,100 मीटर से अधिक की ऊंचाई तक पहुंचती है और फिर लाल सागर के साथ सऊदी अरब के पश्चिमी तट तक पहुंचने के लिए वापस आती है। ओबैद 2004 से 2016 तक सऊदी अरब के कई अधिकारियों के सलाहकार भी रहे हैं।

  • सऊदी तेल सप्लाई बंद होने का सीधा मतलब तेल की कीमतों में बढ़ोतरी है. इससे वैश्विक तेल आपूर्ति ठप हो सकती है.
  • अगर मध्य पूर्व में युद्ध भड़कता है और सऊदी अरब जैसे देशों को नुकसान पहुंचता है तो अमेरिका और पश्चिमी देशों का ध्यान यूक्रेन युद्ध से हट जाएगा और रूस को अपने युद्ध पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी.
  • हथियारों की कमी से जूझ रहे अमेरिका को अपनी ताकत दो तरफ से खर्च करनी पड़ रही है. ईरान में फिर से युद्ध की आशंका बढ़ती जा रही है और अगर हौथी विद्रोही बेकाबू रहे तो युद्ध की आशंका बढ़ती रहेगी.

भारत पर गंभीर असर की आशंका

भारत जैसे देश, जो अपनी ज़रूरत का 80 प्रतिशत तेल ख़रीदते हैं, पर ऐसे युद्ध का गंभीर असर होगा. अगर मध्य पूर्व में युद्ध और भड़का तो भारत को तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होगी. इसके अलावा खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा और नौकरियां भी खतरे में पड़ जाएंगी.

लेखक अभिजात शेखर आज़ाद के बारे मेंअभिजात शेखर आज़ाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में अंतर्राष्ट्रीय मामलों, रक्षा पत्रकार हैं। उनके पास विभिन्न समाचार चैनलों और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 17 वर्षों का अनुभव है। उन्हें अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक कूटनीति और रक्षा रणनीति का विशेषज्ञ माना जाता है। इन वर्षों में, उन्होंने 3 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इज़राइल-हमास युद्ध, मध्य पूर्व, अफगानिस्तान युद्ध, आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई, भारत-पाकिस्तान संघर्ष जैसी महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को कवर किया है।

अभिजात शेखर आज़ाद वैश्विक राजनीति का विश्लेषण करते हैं और इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका विश्लेषण करते हुए विश्लेषणात्मक कहानियाँ लिखते हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय रक्षा क्षेत्र पर उनका खास फोकस है. वह हथियारों की खरीद-फरोख्त और अंतरराष्ट्रीय हथियार व्यापार पर कड़ी नजर रखता है. रक्षा जगत में उनकी अंदरूनी पहुंच के कारण रक्षा मामलों पर उनकी सटीक खबरें काफी प्रभाव रखती हैं। विशेषज्ञता- अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अच्छी पकड़ के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र की खबरों का विश्लेषण। भारतीय वायु सेना और नौसेना और रक्षा खुफिया में प्रवेश।

भू-राजनीति के संबंध में अभिजात शेखर आज़ाद की भविष्यवाणियाँ अक्सर सही साबित होती हैं। उनकी विशेषज्ञता सिर्फ समाचार रिपोर्टिंग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह भारतीय दर्शकों को जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए जाने जाते हैं। राफेल सौदे से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल प्रौद्योगिकी और शक्ति के वैश्विक संतुलन तक हर चीज पर सैकड़ों विश्लेषणात्मक लेख। पत्रकारिता का अनुभव: अभिजात शेखर आज़ाद को पत्रकारिता में लगभग 17 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने 2009 में पत्रकारिता में अपना करियर शुरू किया और ग्राउंड रिपोर्टिंग पर अच्छी पकड़ हासिल कर ली। उन्होंने समाचार प्लस और ज़ी मीडिया जैसे संगठनों में काम किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातक किया। पुरस्कार: अभिजात को ज़ी मीडिया में उनके उत्कृष्ट लेखन के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ लेखक’ का पुरस्कार मिला है। इसके अलावा उन्हें दो बार ENBA अवॉर्ड भी मिल चुका है. अभिषेक के

खास इंटरव्यू: अभिषेक शेखर आजाद का ‘बॉर्डर-डिफेंस’ नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू होता है, जिसमें वह सैन्य अधिकारियों और राजनयिकों से बात करते हैं।

उन्होंने कई बड़े चेहरों से मुलाकात की, जैसे डीआरडीओ के वैज्ञानिक और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माता अतुल दिनकर राणे, डीआरडीओ के वैज्ञानिक हरि बाबू चौरसिया, भारतीय सेना के पूर्व सेना प्रमुख वेद मलिक, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल संजय वर्मा, एयर मार्शल रवि कपूर, वायुसेना अधिकारी विजयेंद्र के ठाकुर, फाइटर पायलट आरके नारंग, डिप्लोमैट एसडी मुनि, डिप्लोमैट सी उदय भास्कर, डिप्लोमैट अनिल त्रिगुणायत, डिप्लोमैट रोबिंदर सचदेव, नेवी कैप्टन श्याम कुमार और एयरफोर्स और नेवी के कई अधिकारियों से बातचीत की है।


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