कैदी दिवस: सलाखों के पीछे सिसकती जिंदगियाँ, फिलीस्तीनी दूतावास ने बयां किया दशकों का दर्द
फिलीस्तीन राज्य के दूतावास ने ‘कैदी दिवस’ की पूर्व संध्या पर एक मार्मिक प्रेस बयान जारी कर उन हजारों फिलीस्तीनी कैदियों की स्थिति की ओर दुनिया का ध्यान खींचा है, जो लंबे समय से दमनकारी व्यवस्था का सामना कर रहे हैं। दूतावास ने इसे एक गहरा मानवीय संकट बताते हुए कहा कि फिलीस्तीनियों की सामूहिक गिरफ्तारी और कैद, वास्तव में आजादी और आत्मनिर्णय की मांग करने वाली आवाजों को कुचलने का एक क्रूर हथियार बन गई है। आंकड़ों की भयावहता को साझा करते हुए बताया गया कि 1967 से अब तक करीब पौने दस लाख (750,000) फिलीस्तीनियों को जेल की सलाखों के पीछे डाला जा चुका है।
7 अक्टूबर, 2023 के बाद के हालातों पर चिंता जताते हुए बयान में दावा किया गया कि यरुशलम सहित कब्जे वाले वेस्ट बैंक में लगभग 22,000 फिलीस्तीनियों को हिरासत में लिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें 1,760 बच्चे, 731 से अधिक महिलाएं और 240 पत्रकार शामिल हैं। दूतावास के अनुसार, जारी किए गए 19,954 से अधिक प्रशासनिक हिरासत आदेश इस पूरी अवधि में हुई कुल गिरफ्तारियों का लगभग 91 प्रतिशत हिस्सा हैं।
दूतावास ने उन परिवारों का दर्द भी साझा किया जो अपने प्रियजनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। 1967 से अब तक हिरासत के दौरान 326 कैदियों की जान जा चुकी है, जिनमें से 86 मौतें अकेले अक्टूबर 2023 के बाद हुई हैं। विडंबना यह है कि 97 कैदियों के पार्थिव शरीर आज भी उनके परिजनों को नहीं सौंपे गए हैं। गाजा के कई बंदी ‘जबरन लापता’ (enforced disappearance) की श्रेणी में हैं। वर्तमान में इजराइली जेलों में करीब 9,600 फिलीस्तीनी बंद हैं, जिनमें 350 बच्चे और 84 महिलाएं शामिल हैं। इनमें से 3,532 कैदी ऐसे हैं, जिन पर न तो कोई आरोप तय है और न ही कोई मुकदमा चल रहा है।
बंदियों की स्थिति को भयावह बताते हुए दूतावास ने आरोप लगाया कि उन्हें चिकित्सा उपेक्षा, बुनियादी अधिकारों का हनन, शारीरिक शोषण और कुछ मामलों में यौन हिंसा तक का सामना करना पड़ता है। गाजा संघर्ष की शुरुआत के बाद से हिरासत में सौ से अधिक कैदियों की मौत की खबरें भी सामने आई हैं।
बयान में ‘प्रशासनिक हिरासत’ की तुलना औपनिवेशिक काल के दमनकारी ‘रॉलेट एक्ट’ से की गई, जो सुरक्षा के नाम पर बिना किसी मुकदमे के अनिश्चितकाल तक कैद रखने की इजाजत देता है। हाल ही में प्रस्तावित “मृत्युदंड” कानून जैसे विधायी कदमों पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून और नैतिकता के खिलाफ बताया गया है। अप्रैल 2024 में यूरो-मेड ह्यूमन राइट्स मॉनिटर की रिपोर्ट “दीवारों के पीछे एक और नरसंहार” का हवाला देते हुए दूतावास ने चेतावनी दी कि इजराइली हिरासत केंद्र अब व्यवस्थित दुर्व्यवहार के अड्डों में तब्दील हो चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये क्रूर प्रथाएं ‘युद्ध अपराध’ और ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ की श्रेणी में आती हैं, जिसके लिए वैश्विक जवाबदेही तय करना अनिवार्य है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
