भारत-अफगानिस्तान व्यापार का नया सवेरा: बाधाएं दूर, विकास की राहें खुलीं
नई दिल्ली और काबुल के बीच द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
अफगानिस्तान के वाणिज्य मंत्री, अलहाज नूरुद्दीन, ने हाल ही में नई दिल्ली और काबुल के बीच द्विपक्षीय व्यापार को पुनर्जीवित करने और विस्तारित करने की दिशा में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि दोनों देश इस दिशा में काफी करीब पहुंच गए हैं, और जिन बाधाओं ने अब तक व्यापारिक संबंधों को प्रभावित किया था, उन्हें सफलतापूर्वक सुलझा लिया गया है।
व्यापारिक संबंधों को सुगम बनाने के लिए उठाए गए कदम:
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अब दोनों देश गर्व की भावना के साथ काम कर रहे हैं, और उनका लक्ष्य वर्तमान 1 अरब अमेरिकी डॉलर के व्यापार को और आगे ले जाना है।
- वीज़ा और कनेक्टिविटी: वीज़ा और सीधी उड़ानों से जुड़ी समस्याओं का समाधान कर लिया गया है, जिससे व्यापारियों और यात्रियों की आवाजाही अब और सुगम हो गई है। चाबहार लिंक, जमीनी मार्गों और हवाई गलियारों पर भी बातचीत प्रगति पर है।
- संयुक्त कार्य समूह और वाणिज्य दूतावास: व्यापार पर संयुक्त कार्य समूह को सक्रिय करने पर सहमति हुई है। इसके तहत, प्रत्येक पक्ष एक-दूसरे की राजधानी में एक वाणिज्यिक अटैची तैनात करेगा, जो एक महीने के भीतर लागू होने की उम्मीद है।
- वाणिज्य मंडल और टैरिफ में कमी: व्यापारिक जुड़ाव बढ़ाने के लिए, भारत और अफगानिस्तान एक संयुक्त वाणिज्य मंडल स्थापित करेंगे। व्यापार विस्तार को बढ़ावा देने के लिए टैरिफ में भी पारस्परिक रूप से कमी की जाएगी।
- व्यापार मेले और खाद्य सुरक्षा: उद्योगों को दोनों पक्षों के बाजारों तक सीधी पहुंच प्रदान करने के लिए हर साल व्यापार मेलों का आयोजन किया जाएगा। अफगान निर्यातकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में, अफगान खाद्य वस्तुओं पर FSSAI शुल्क शून्य हो जाएगा, जिससे भारत में कृषि और प्रसंस्कृत वस्तुओं का प्रवेश आसान हो जाएगा।
स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सहयोग का विस्तार:
भारत इलाज कराने आए अफगान नागरिकों के लिए और वीजा जारी करेगा। अफगानिस्तान ने एक प्रमुख भारतीय अस्पताल श्रृंखला को देश में शाखा खोलने के लिए आमंत्रित किया है, और भारत इस सहयोग के तहत तकनीशियन और विशेषज्ञ भेजने के लिए तैयार है।
वित्तीय सहयोग में प्रगति:
वित्तीय मामलों पर, मंत्री ने स्वीकार किया कि बैंकिंग क्षेत्र में कुछ छोटी-मोटी समस्याएं हैं, लेकिन दोनों देशों के बैंक संपर्क में रहेंगे और सहयोग को आगे बढ़ाएंगे।
यह प्रगति निश्चित रूप से भारत और अफगानिस्तान के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगी और दोनों देशों के नागरिकों के लिए नए अवसर खोलेगी।
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