मिट्टी और पत्थर: बलूचिस्तान का वो ‘लो-टेक’ वार रूम जिसने हिला दी पाकिस्तान की चूलें
बलूचिस्तान के एक खामोश मंसूबे ने भारत समेत पूरी दुनिया के होश उड़ा दिए हैं। बिना किसी आधुनिक संसाधन के, बलूच लड़ाकों ने सिर्फ मिट्टी और पत्थरों के दम पर वो कर दिखाया, जो बड़ी-बड़ी सेनाओं के लिए भी नामुमकिन है। हालांकि, इस जंग के बीच बलूचों ने भारत से एक ऐसी चीज मांगी है जिसने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। युद्ध जीतने के लिए आमतौर पर हौसले और आधुनिक हथियारों की जरूरत होती है, लेकिन बलूचिस्तान के फ्रीडम फाइटर्स ने साबित कर दिया कि अगर जज्बा बड़ा हो, तो बिना किसी हाई-टेक वॉर रूम या टेक्नोलॉजी के भी दुश्मन की धज्जियां उड़ाई जा सकती हैं।
बलूचों ने मिट्टी और पत्थरों से युद्ध का एक ऐसा नायाब मॉडल तैयार किया, जिसने पाकिस्तानी सेना पर कहर बरपा दिया। हाल ही में हुए हमले के बाद जब बलूच फाइटर्स ने अपना ‘वॉर रूम’ दुनिया को दिखाया, तो सब दंग रह गए। वहां न कोई कंप्यूटर था, न प्रोजेक्टर और न ही कोई बड़ी एलईडी स्क्रीन; वहां थी तो सिर्फ बलूच सरजमीं की मिट्टी और चंद पत्थर।
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इसी मिट्टी और पत्थरों की बिसात बिछाकर बलूच लड़ाकों ने अपने हमले का ब्लूप्रिंट तैयार किया। पत्थरों को मोहरों की तरह इस्तेमाल कर हमले की लोकेशन समझी गई और फिर पाकिस्तानी फौज पर जोरदार धावा बोल दिया गया। इस ‘देसी’ रणनीति का असर इतना घातक था कि महज 72 घंटों के भीतर 42 पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया गया। मिट्टी और पत्थर से मॉडल बनाना अब बलूचों की सबसे बड़ी युद्ध नीति बन चुकी है।
कुछ समय पहले जब पाकिस्तान की ‘जफर एक्सप्रेस’ को निशाना बनाया गया था, तब भी इसी तकनीक का सहारा लिया गया था। उस वक्त मिट्टी से रेलवे ट्रैक का ढांचा तैयार किया गया और लकड़ियों के इशारे से लड़ाकों को समझाया गया कि किस सटीक पॉइंट पर ट्रेन को उड़ाना है। जैसे ही ट्रेन उस लोकेशन पर पहुंची, उसे धमाके से उड़ा दिया गया। बलूचों का साफ कहना है कि उनकी प्लानिंग भले ही हाई-टेक न हो, लेकिन उसकी सफलता 100 फीसदी है। उनका मानना है कि इस मिट्टी में उनके अपनों का खून मिला है, जो पाकिस्तान के जुल्मों की गवाही देता है।
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अब यही मिट्टी पाकिस्तान की बर्बादी की इबारत लिख रही है। बलूच लड़ाकों का दावा है कि पाकिस्तान को शिकस्त देने के लिए उन्हें बहुत महंगे हथियारों की दरकार नहीं है, वे अपनी पुरानी राइफलों से ही उसे खत्म करने का माद्दा रखते हैं। बलूच नेतृत्व ने तो यहाँ तक कह दिया कि 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों ने सरेंडर के वक्त भारत को जो हथियार सौंपे थे, अगर भारत वही बंदूकें और प्रति राइफल 10 गोलियां उन्हें दे दे, तो वे अकेले ही पाकिस्तान के वजूद को खत्म कर सकते हैं।
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