महाविनाश का काउंटडाउन: ईरान की एक चूक और इजरायल में शुरू होगा महाप्रलय!

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महाविनाश का काउंटडाउन: ईरान की एक चूक और इजरायल में शुरू होगा महाप्रलय!
एक गलती और इजरायल में भीषण तबाही, इस बार फोड़ने को तैयार बैठा ईरान?

मिडिल ईस्ट में महाजंग की आहट: ईरान की सीधी चेतावनी – ‘लेबनान पर एक भी वार हुआ, तो इजरायल पर बरपेगा कहर!’

लेबनान की धरती पर अब अगर एक भी इजरायली मिसाइल गिरी, तो ईरान सीधे इजरायल के सीने पर वार करेगा। इसे महज एक खोखली धमकी समझने की गलती भारी पड़ सकती है, क्योंकि यह अगली बड़ी जंग का खुला ऐलान है। दिलचस्प बात यह है कि यह हुंकार किसी छोटे-मोटे नेता ने नहीं, बल्कि ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने भरी है। अरागची वही शख्स हैं जो वैश्विक पटल पर ईरान का चेहरा हैं और अमेरिका के साथ होने वाली महत्वपूर्ण वार्ताओं की धुरी रहे हैं।

माना जा रहा है कि विदेश मंत्री अरागची का यह बयान असल में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मुजतबा खामनेई की ही मंशा है। यह इजरायल और उसके सबसे बड़े हिमायती अमेरिका के लिए एक ‘अंतिम चेतावनी’ है—कि अगर अब लेबनान को निशाना बनाया गया, तो ईरान चुप नहीं बैठेगा। ईरान के इसी आक्रामक रुख को भांपते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर बेंजामिन नेतन्याहू को फोन पर कड़ी फटकार लगाई थी और उन्हें ‘पागल’ तक कह दिया था। अमेरिका अच्छी तरह जानता है कि हिजबुल्लाह के वजूद की खातिर ईरान किसी भी हद तक जा सकता है।

हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि इजरायल का अस्तित्व केवल अमेरिका की बदौलत बचा हुआ है, वरना अब तक उसका नामोनिशान मिट गया होता। ऐसे में ईरान की सीधी हमले की धमकी के गहरे मायने हैं। भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब उस मोड में आ चुका है जहाँ ‘ईंट का जवाब पत्थर’ से दिया जाएगा। पिछली बार की जंग के बाद ईरान का मनोबल बढ़ा है और वह इस बार किसी भी ‘जुर्रत’ पर सीधा प्रहार करने को तैयार है। कुवैत में अमेरिकी पांचवीं फ्लीट के मुख्यालय और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों ने ईरान के इरादे साफ कर दिए हैं।

फिलहाल ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद इजरायल ने लेबनान पर हमले रोके जरूर हैं, लेकिन ईरान के नए तेवर बताते हैं कि वह अब इजरायल की किसी भी हिमाकत को बर्दाश्त नहीं करेगा। गौरतलब है कि सीजफायर की तमाम कोशिशों के बीच भी इजरायल लगातार दक्षिण लेबनान को दहला रहा था, जिसका हिजबुल्लाह भी मुंहतोड़ जवाब दे रहा था। ईरान ने पहले ही साफ कर दिया था कि किसी भी शांति वार्ता की पहली शर्त लेबनान पर हमलों का रुकना है।

अब देखना यह है कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच यह नाजुक शांति कब तक कायम रहती है। अगर यह सीजफायर जरा भी डगमगाया, तो ईरान का कहर इजरायल पर सीधे टूटेगा। इस खतरे को अमेरिका और अरब देश बखूबी समझ रहे हैं। सबसे ज्यादा असमंजस में वे अरब देश हैं जिन्होंने अमेरिका के भरोसे ईरान से दुश्मनी मोल ली थी, लेकिन अब उन्हें लग रहा है कि अमेरिका ने उन्हें बीच मजधार में अकेला छोड़ दिया है। मिडिल ईस्ट की बिसात पर अगली चाल किसकी होगी, इसी पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।


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