वाशिंगटन, पांच नवंबर (एपी) अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए धुआंधार चुनावी सभाएं कीं और समर्थकों से यहां तक अपील की कि वे उन्हें ही उम्मीदवार मानकर मतदान करें, लेकिन इसके बावजूद उनकी रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। अब ट्रंप इस हार से अपना पल्ला झाड़ने और यह साबित करने में जुटे हैं कि इसके लिए वह जिम्मेदार नहीं हैं। रिपब्लिकन पार्टी की इस करारी शिकस्त के बाद अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में डेमोक्रेटिक पार्टी का दबदबा कायम हो गया है।
डेमोक्रेट्स ने सीनेट में भी उन कई सीट पर जीत दर्ज की है, जिन्हें कभी रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता था। उन्होंने साउथ कैरोलाइना और कंساس में भी जीत हासिल की, जहां 1932 के बाद से कोई डेमोक्रेटिक सीनेटर नहीं चुना गया था। वहीं, टेक्सास में तीन दशक से अधिक समय से राज्यस्तरीय चुनावों में लगातार हार का सामना कर रहे डेमोक्रेट्स ने इस बार वहां भी जीत दर्ज की।
चुनाव परिणामों की पूरी तस्वीर सामने आने से पहले ही ट्रंप ने अपने कदम पीछे खींचने शुरू कर दिए थे। चुनावी रात वह सामान्य दिनों की तुलना में कुछ अधिक विनम्र दिखाई दिए। उन्होंने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने और चुनाव परिणामों को स्वीकार करने की बात कही।
हालांकि, इसके बावजूद वह हार की जिम्मेदारी लेने से बचते नजर आए। ट्रंप ने ‘फॉक्स न्यूज’ से कहा, ‘‘मैं इसे अपनी हार नहीं मानना चाहता। मैं खुद चुनाव मैदान में नहीं था।’’ उन्होंने दावा किया कि मतदाताओं को चुनाव लड़ रहे ‘‘उम्मीदवार पसंद नहीं आए।’’
हालांकि, ‘द एपी वोटर पोल’ के आंकड़े संकेत देते हैं कि ट्रंप खुद रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए बड़ी कमजोरी साबित हुए।
देशभर में केवल 10 में से चार मतदाताओं (40 प्रतिशत) ने राष्ट्रपति के रूप में उनके कामकाज को सराहा। ओहायो, आयोवा, मेन और नॉर्थ कैरोलाइना जैसे राज्यों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा। इन राज्यों में ज्यादातर मतदाताओं का मानना था कि रिपब्लिकन पार्टी के सीनेट उम्मीदवार इस अलोकप्रिय राष्ट्रपति का ‘‘जरूरत से ज्यादा समर्थन’’ कर रहे हैं।
इसके बावजूद राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया मंच पर दावा किया कि अगर वह खुद चुनाव लड़ रहे होते, तो ‘‘हम भारी बहुमत से जीतते!’’
छोटे-बड़े मामलों में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का ट्रंप का पुराना इतिहास रहा है। खासकर चुनावी हार के मामले में उनका रवैया ऐसा ही रहा है। अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2018 के चुनाव में जब रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा में हार गई थी, तब भी उन्होंने अपनी ही पार्टी के पराजित उम्मीदवारों पर हार का ठीकरा फोड़ा था।
यूटा की तत्कालीन सांसद मिया लव ने ट्रंप से दूरी बनाने की कोशिश की थी। इस पर राष्ट्रपति ने कहा था, ‘‘मिया लव ने मुझे कोई तवज्जो नहीं दी और फिर वह हार गईं। बहुत बुरा हुआ।’’
उन्होंने चुनाव हारने वाले उन उम्मीदवारों का भी मजाक उड़ाया था, जिन्होंने खुलकर उनका समर्थन नहीं किया था।
इनमें फ्लोरिडा के कार्लोस कुर्बेलो, कोलोराडो के माइक कॉफमैन, वर्जीनिया की बारबरा कॉमस्टॉक और इलिनॉय के पीटर रोस्कम शामिल थे। तब उन्होंने तंज कसते हुए वही बात कही थी, जिसे वह आठ साल बाद भी दोहराने वाले थे-‘‘इन चुनाव में मैं उम्मीदवार ही नहीं था।’’
अब एक बार फिर ट्रंप चुनावी हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि उन्होंने खुद मतदाताओं से कहा था कि वे ‘‘यह मानकर मतदान करें कि उम्मीदवार मैं ही हूं।’’
एक सितंबर के बाद से ट्रंप की 39 चुनावी सभाओं और भाषणों के एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के विश्लेषण से पता चलता है कि उन्होंने 30 सभाओं में इस अपील का जिक्र किया था। कुछ भाषणों में उन्होंने यह बात एक से अधिक बार दोहराई।
इस तरह कम से कम 40 मौकों पर उन्होंने मतदाताओं से उन्हें ही उम्मीदवार मानकर वोट देने की अपील की थी। आमतौर पर चुनाव में झटका लगने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन आत्ममंथन करते हैं और राष्ट्रपति सार्वजनिक रूप से हार की कुछ न कुछ जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं। वर्ष 2010 के चुनाव में जब रिपब्लिकन पार्टी ने संसद में बड़ी जीत हासिल की थी, तब तत्कालीन डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी पार्टी की हार को ‘‘करारी शिकस्त’’ करार दिया था।
इसी तरह, 2006 के चुनाव में जब डेमोक्रेट्स ने जीत दर्ज की थी, तब तत्कालीन रिपब्लिकन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने इसे ‘‘जोरदार झटका’’ बताया था। लेकिन राष्ट्रपति पद की स्थापित परंपराओं को तोड़ने के लिए पहचाने जाने वाले ट्रंप ने इस बार मतदान से काफी पहले ही हार का दोष अपने सिर न आने देने की रणनीति बना ली थी। उन्होंने अगस्त में ‘पंचबोल न्यूज’ से कहा था कि मतदाता रिपब्लिकन नेताओं से नाराज हैं, ‘‘लेकिन वे मुझसे नाराज नहीं हैं।’’
पिछले महीने ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर लिखा था कि यदि टेक्सास के रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवार केन पैक्सटन चुनाव हारते हैं तो इसके लिए ‘‘जॉन कॉर्निन और कार्ल रोव जैसे कमजोर और अप्रभावी राजनीतिक मोहरे’’ जिम्मेदार होंगे।
पैक्सटन को इस चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है। ट्रंप ने पार्टी के प्राइमरी चुनाव में मौजूदा सीनेटर जॉन कॉर्निन के बजाय विवादित छवि वाले पैक्सटन का समर्थन करने का जोखिम उठाया था। कॉर्निन 2002 से सीनेट के सदस्य थे और उन्हें अधिक सुरक्षित उम्मीदवार माना जा रहा था।
इसके अलावा, ट्रंप के सहयोगी एवं टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट भी चुनाव हार गए। इस पर ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि एबॉट ‘‘अपने राजनीतिक जीवन के आखिरी छह महीनों में ‘रीनो’ (नाम के रिपब्लिकन) नहीं बने होते, तो वह नहीं हारते।’’ इसके जरिए उन्होंने संकेत दिया कि गवर्नर अपने कट्टर रूढ़िवादी रुख से पीछे हट गए थे। हालांकि, मंगलवार को चुनाव परिणाम आने के बाद ट्रंप ने चुनावी धांधली का आरोप नहीं लगाया, जैसा कि वह पिछली हार के बाद करते आए थे।
वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद ट्रंप ने झूठा दावा किया था कि उनके विरोधियों ने चुनाव में गड़बड़ी की है। हालांकि, उनके पक्ष में कराई गई मतगणना की दोबारा जांच, लेखा-परीक्षण और दायर दर्जनों याचिकाओं के बावजूद उनके दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। इन सभी प्रक्रियाओं के बाद डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडन की जीत की पुष्टि हुई थी।
यहां तक कि ट्रंप के अपने अटॉर्नी जनरल ने भी कहा था कि बड़े पैमाने पर मतदाता धोखाधड़ी का कोई सबूत नहीं मिला है।
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